सिर्फ 1 मिनट हाथ की उंगलीयों को रगड़ने से शरीर के किसी भी हिस्से का दर्द हो जायेगा गायब.!!!

Just Rub Your Fingers For a Minute And See The Magic : संवेदनशीलता की प्राचीन जापानी कला (Jin Shin Jyutsu method) के अनुसार, प्रत्येक उंगली विशेष बीमारी और भावनाओं के साथ जुडी होती है| हमारे हाथ की पांचो उंगJust Rub Your Fingers For a Minute And See The Magic : संवेदनशीलता की प्राचीन जापानी कला (Jin Shin Jyutsu method) के अनुसार, प्रत्येक उंगली विशेष बीमारी और भावनाओं के साथ जुडी होती है| हमारे हाथ की पांचो उंगलिया शरीर के अलग अलग अंगों से जुडी होती है| इसका मतलब आप को दर्द नाशक दवाइयां खाने की बजाए इस आसान और प्रभावशाली तरीके का इस्तेमाल करना करना चाहिए| आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बतायेगे के शरीर के किसी हिस्से का दर्द सिर्फ हाथ की उंगली को रगड़ने से कैसे दूर होता है|

हमारे हाथ की अलग अलग उंगलिया अलग अलग बिमारिओ और भावनाओं से जुडी होती है| शायद आप को पता न हो, हमारे हाथ की उंगलिया चिंता, डर और चिड़चिड़ापन दूर करने की क्षमता रखती है| उंगलियों पर धीरे से दबाव डालने से शरीर के कई अंगो पर प्रभाव पड़ेगा|

अंगूठा- The Thumb – हाथ का अंगूठा हमारे फेफड़ो से जुड़ा होता है| अगर आप की दिल की धड़कन तेज है तो हलके हाथो से अंगूठे पर मसाज करे और हल्का सा खिचे| इससे आप को आराम मिलेगा|

तर्जनी -The Index Finger – ये उंगली आंतों gastro intestinal tract से जुडी होती है| अगर आप के पेट में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा रगड़े, दर्द गयायब हो जायेगा|

बीच की उंगली (मध्यमा) -The Middle Finger- ये उंगली परिसंचरण तंत्र तथा circulation system से जुडी होती है| अगर आप को चक्कर या आपका जी घबरा रहा है तो इस उंगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी|

तीसरी उंगली (अनामिका) – The Ring Finger- ये उंगली आपकी मनोदशा से जुडी होती है| अगर किसी कर्ण आपका मनोदशा अच्छा नहीं है या शांति चाहते हो तो इस उंगली को हल्का सा मसाज करे और खिचे, आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जयेगे, आप का मूड खिल उठेगा|

छोटी उंगली – The Little Finger- छोटी उंगली का किडनी और सिर के साथ सम्बन्ध होता है| अगर आप को सिर में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा दबाये और मसाज करे, आप का सिर दर्द गयब हो जायेगा| इसे मसाज करने से किडनी भी तंदरुस्त रहती है|

लिया शरीर के अलग अलग अंगों से जुडी होती है| इसका मतलब आप को दर्द नाशक दवाइयां खाने की बजाए इस आसान और प्रभावशाली तरीके का इस्तेमाल करना करना चाहिए| आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बतायेगे के शरीर के किसी हिस्से का दर्द सिर्फ हाथ की उंगली को रगड़ने से कैसे दूर होता है|
हमारे हाथ की अलग अलग उंगलिया अलग अलग बिमारिओ और भावनाओं से जुडी होती है| शायद आप को पता न हो, हमारे हाथ की उंगलिया चिंता, डर और चिड़चिड़ापन दूर करने की क्षमता रखती है| उंगलियों पर धीरे से दबाव डालने से शरीर के कई अंगो पर प्रभाव पड़ेगा|

 अंगूठा- The Thumb – हाथ का अंगूठा हमारे फेफड़ो से जुड़ा होता है| अगर आप की दिल की धड़कन तेज है तो हलके हाथो से अंगूठे पर मसाज करे और हल्का सा खिचे| इससे आप को आराम मिलेगा|
तर्जनी -The Index Finger – ये उंगली आंतों gastro intestinal tract से जुडी होती है| अगर आप के पेट में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा रगड़े, दर्द गयायब हो जायेगा|

बीच की उंगली (मध्यमा) -The Middle Finger- ये उंगली परिसंचरण तंत्र तथा circulation system से जुडी होती है| अगर आप को चक्कर या आपका जी घबरा रहा है तो इस उंगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी|

तीसरी उंगली (अनामिका) – The Ring Finger- ये उंगली आपकी मनोदशा से जुडी होती है| अगर किसी कर्ण आपका मनोदशा अच्छा नहीं है या शांति चाहते हो तो इस उंगली को हल्का सा मसाज करे और खिचे, आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जयेगे, आप का मूड खिल उठेगा|

छोटी उंगली – The Little Finger- छोटी उंगली का किडनी और सिर के साथ सम्बन्ध होता है| अगर आप को सिर में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा दबाये और मसाज करे, आप का सिर दर्द गयब हो जायेगा| इसे मसाज करने से किडनी भी तंदरुस्त रहती है|

मोरपंख में होती है अद्भुत शक्ति, घर में इस जगह रखने से दूर होती है हर तरह की परेशानी

इसमें जरा भी कोई संदेह नहीं है कि मोर पंख हमारे आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है और हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर जीवन को खुशहाल बना देता है। देवराज इंद्र को मोरपंख का सिंहासन भाता है, भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने मुकुट पर मोरपंख को सजाया। यहां तक कि पौराणिक काल में महर्षियों ने मोरपंख की कलम बनाकर बड़े-बड़े ग्रंथों की रचना की। इन उदाहरणों से यह साबित होता है कि मोर का पंख हमारे लिए कितना पवित्र और महत्वपूर्ण है। प्राचीन काल से ही मोर के पंखों का इस्तेमाल कई तरह के कामों के लिए किया जाता रहा है।

मोर के पंख के कुछ खास उपाय, जो आपकी परेशानियों को दूर कर सकते हैं...
-मोरपंख में अद्भुत शक्ति होती है। इसकी शक्ति के चमत्कार से खुद भगवान भी अभिभूत रहे हैं। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जिस जगह मोरपंख होता है, वहां बुरी शक्तियां आसपास भी नहीं भटक सकती हैं। जी हां, मोर का पंख किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों और प्रतिकूल चीजों के प्रभाव से बचाकर रखने की क्षमता रखता है, इसलिए मोर के पंखों को घर में रखना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होगा। मोर के पंख का इस्तेमाल करके भूत-बाधा, नजर दोष, रोग मुक्ति, ग्रह दोष, वास्तु दोष जैसी समस्याओं से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है।

  1. -मोर का पंख पढऩेवालेस्टूडेंट्सके लिए लाभदायक होता है। स्टूडेंट्स पुस्तकों के बीचों-बीच अभिमंत्रित मोर पंख रख कर लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा मंत्र सिद्धि के लिए जपने वाली माला को मोर के पंखों के बीच रखना चाहिए।
  2. -नव ग्रहों की खराब दशा से बचने के लिए भी मोर का पंख आपकी मदद कर सकता है। घर में अलग अलग स्थान पर मोर का पंख रखने से घर का वास्तु दोष दूर होता है।
  3. -मोर के पंख का उपयोग रोगों के इलाज के लिए भी किया जाता है। मोर के पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला तथा बांझपन जैसे रोगों का इलाज किया जा सकता है।
  4. -घर के दक्षिण-पूर्व दिशो में मोर का पंख लगाने से घर में बरकत होने लगती है। घर से सदस्यों की अचानक से आनेवाले किसी भी कष्ट से रक्षा होती है। घर से हर परेशानी दूर हो जाती है।
  5. -मोर के पंख और सांप के बीच में दुश्मनी है, इसलिए मोर का पंख घर में रखने से सांप घर में प्रवेश नहीं करता। इसके अलावा मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर-पश्चिम दीवार में लगाने से राहू का दोष की भी नहीं परेशान करता है।
  6. -मोर का एक पंख किसी मंदिर में राधाकृष्ण कि मूर्ती के मुकुट में 40 दिन के लिए स्थापित करें। हर रोज शाम को मक्खन और मिश्री का भोग लगाएं। फिर 41 वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से घर लाकर अपने लॉकर में रखें। आप खुद महसूस करेंगे कि घर में सुख-शांति की वृद्धि हो रही है।
  7. -कालसर्प दोष को भी दूर करने की इस मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है। कालसर्प वाले व्यक्ति को अपने तकिए के खोल के अंदर 7 मोर के पंख सोमवार की रात को रखना चाहिए और उसी तकिए पर सोना चाहिए।
  8. -अगर आप किसी शत्रु से परेशान हैं, तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिंदूर से मंगलवार या फिर शनिवार को उसका नाम लिखकर अपने घर के मंदिर में रात भर रखें। अगली सुबह उठकर बगैर नहाए उसे चलते पानी में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से आपका शत्रु भी आपसे मित्रता का व्यवहार करने लगेगा।
  9. -अगर घर में कोई बच्चा जिद्दी हो, तो मोर के पंखों से बच्चे को हवा देने से धीरे-धीरे उसकी जिद कम होने लगेगी। मोर के पंख को चांदी की ताबीज में डालकर नवजात बच्चे के सिर के पास रखने पर बच्चे की नजर दोष और किसी भी तरह की अला-बला से रक्षा होती है।

5 दिनों में रंग एकदम गोरा होगा ये उपाय करके तो देखो

हम सभी संतरा खाने के बाद उसके छिलके को कूड़ेदान में फेंक देते हैं। हमें ये लगता है कि संतरे के छिलका के क्या फायदे हो सकते हैं, पर आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि संतरे का छिलका न केवल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है बल्क‍ि खूबसूरती निखारने में भी ये बहुत कारगर है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण त्वचा और बाल दोनों को निखारने का काम करता है। अगर आप ग्लोइंग और बेदाग त्वचा की इच्छा रखते हैं तो एकबार संतरे के छिलके को जरूर इस्तेमाल करके देखें।

इसके छिलके से पाउडर बनाना बहुत ही आसान है। सबसे पहले संतरे के छिलके को धूप में सूखने के लिए डाल दीजिए। जब ये अच्छी तरह सूख जाए तब इसे मिक्सर में पीस लीजिए। एक जार में इस पाउडर को भरकर रख लीजिए। संतरे के छिलके का इस्तेमाल बाजार में महंगे दामों में बिकने वाले कई उत्पादों में किया जाता है।

1. ये चेहरे पर निखार लाने का काम करता है
संतरे के छिलके के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर लगाने से टैनिंग दूर हो जाती है और चेहरे पर निखार आता है।

2. सूक्ष्म रंध्रों को खोलने में मददगार
संतरे के छिलके के पाउडर में कुछ मत्रा दही की मिलाकर इसे चेहरे पर लगाने से सूक्ष्म रंध्र खुल जाते हैं और साथ ही ब्लैक हेड्स भी साफ हो जाते हैं।

3. कील मुंहासों की रोकथाम के लिए
संतरे के छिलके का पाउडर त्वचा पर मौजूद सारी गंदगी को साफ कर देता है। इस पाउडर में थोड़ी सी मात्रा गुलाब जल की मिलाकर लगाने से कील-मुंहासों की समस्या में फायदा होता है।

4. दाग-धब्बे दूर करने में मददगार
संतरे के छिलके में रंगत साफ करने की जबरदस्त खूबी होती है। जिसके चलते किसी भी प्रकार के दाग-धब्बे को दूर करने में ये बहुत ही कारगर होता है।

5. बालों के लिए भी फायदेमंद
संतरे का छिलका न केवल त्वचा के लिए फायदेमंद है बल्क‍ि बालों के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं है। ये रूसी दूर करने में बहुत ही कारगर है। साथ ही अगर आपके बाल बहुत अधिक गिर रहे हैं और अपनी चमक खो चुके हैं तो भी संतरे का छिलका इस्तेमाल किया जा सकता है।

वायग्रा के 10 बड़े साइड इफ़ेक्ट जिसे सुनकर आप के होश उड़ जायेंगे ….Side Effects of Viagra

यह तो सब लोगो को पता है की सेक्स हमारे लाइफ में एक अहम हिस्सा है वह अपने साथी के साथ को पूरी तरह संतुष्ट करे इसके लिए आदमी सेक्स पॉवर को अधिक करने के लिए  वायग्रा का प्रयोग करना शुरु कर दिया है ..

लेकिन उन्हें यह नही पता की उससे साइडइफेक्ट क्या है ..
आज हम आप को बतायेंगे उसके साइड इफेक्ट

1 – वायग्रा के अधिक सेवन से बचें यह आपकी सेक्स पॉवर बढ़ाने के साथ ही आपको अपना आदी बना लेती है. आप इसके बिना अपने आपको कमजोर समझने लगते हैं, जिससे आपके आत्मविश्वास में कमी आती है.

2 – कई बार आपका वायग्रा का इस्तेमाल आपके पार्टनर को दुविधा में डाल सकता है. पार्टनर के संतुष्ट होने के बाद भी आप का लगातार सेक्स के लिए प्रेशर बनाना आपकी शादीशुदा लाइफ को बर्बाद कर सकता है.

3-वायग्रा के प्रयोग से अंधापन सहित कई दृष्टि समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है. जैसे धुंधला दिखना, नीले और हरे रंगों के बीच अंतर करने में कठिनाई या वस्तुओं में नीले रंग को देखना आदि समस्‍याओं का कारण बनता है.

4-जुनून की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए, खुद को जोखिम में डालना कोई बहादुरी का काम नहीं है. इसके अधिक प्रयोग से अचानक सुनने की क्षमता खो जाती है.

5 – वायग्रा दवाएं डॉक्टरों की सलाह के बाद ही प्रयोग में लाए, क्योंकि इससे दिल संबंधी समस्याएं होने का भी खतरा होता है. जैसे सीने में दर्द, रक्तचाप में अचानक गिरावट इत्यादि.

6 – महिलाएं भी सेक्स उत्तेजना बढ़ाना के लिए इन नीली गोलियों का प्रयोग करती है. यह गोलियां महिलाओं के लिए भी होती हैं, लेकिन इसके प्रयोग से वह बांझपन की शिकार हो सकती हैं.

7 – कुदरती तौर पर हर इंसान के अंदर सेक्स को लेकर अजीब सी उत्तेजना होती है, लेकिन इन्हें गोलियां खाकर न निकालें. इससे आपके प्राइवेट पार्ट पर भी असर पड़ सकता है.

8 – यह तथ्य जानकर आप चौंकने के साथ—साथ चौकन्ने भी हो जाएंगे. जी हां, वायग्रा की गोलियां खाने से आपको स्क्नि कैंसर भी हो सकता है. जो पुरुष इरेक्टाइल डिस्फंक्‍शन की समस्‍या के लिए वियाग्रा का इस्‍तेमाल करते है, वह मेलेनोमा के उच्‍च जोखिम पर होते हैं और भारी नुकसान उठाते हैं.

9 – वायग्रा आपके इरेक्‍शन के समय को बढ़ा देती है, जिससे हालात दर्दनाक हो सकते हैं. दुर्लभ मामलों में, इरेक्‍शन दर्दनाक और लंबे समय यानी 4 या उससे अधिक घंटे तक हो सकता है. इसलिए वियाग्रा के उपयोग को रोककर तुरंत चिकित्‍सा सहायता लें.

10 – वायग्रा के उपयोग से सांस लेने में कठिनाई और चेहरा, होंठ, जीभ, या गले की सूजन आदि जैसी कठिनाई युक्त एलर्जी की प्रतिक्रिया होने पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.

काले घोड़े की नाल का ये अचूक उपाय आप को धन से मालामाल कर देगा

हमारे हिन्दू धर्म में प्रकृति को मनुष्य के जीवन की गहराई में पिरोया गया है तथा यदि हम ग्रहों की बात करे तो ज्योतिष विद्या जैसे अत्यंत प्राचीन शास्त्र के अंतर्गत यह उल्लेखित किया किया गया है की सौरमंडल की चाल, गति, दशा और बैठकी ही मनुष्य के जीवन को संचालित कर रहे है.

यु तो हमारे जीवन जीवन पर सभी नौ ग्रह अपनी-अपनी तरह से प्रभाव दर्शाकर हमारे भविष्य और वर्तमान को प्रभावित करते हैं. लेकिन इन सभी में से अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावी माना गया है तो वह शनि ग्रह

शनि देव न्याय के देवता कहलाते है शनि देव को प्रसन्न कर, उनकी कृपा प्राप्त करने का उपाय ज्योतिष शास्त्र में मौजूद हैं. इनमें सबसे प्राथमिक और असरदार उपाय है काले घोड़े की नाल का यह सिर्फ शनि देव को प्रसन्न करने ही नहीं बल्कि अन्य समस्याओ एवम धन प्राप्ति से सम्बन्धित उपायो में भी काम आता है

वास्तु शास्त्र में भी काले घोड़े की नाल को शुभ बतलाया गया है, माना जाता है की काले घोड़े के पैरो में शनि देव का प्रभाव होता है. कहते हैं कि शनि को लोहा प्रिय है, किन्तु शनिवार को लोहा घर में नहीं लाया जाता. जिस धातु को शनि सर्वाधिक पसंद करते हैं, उसी धातु का घर में शनिवार को आना पीड़ादायक और कलहकारक सिद्ध होता है

ऐसा तभी होता है जबकि निजी उपयोग के लिए शनिवार को लोहा खरीदा जाये या घर में लाया जाये, लेकिन पूजा करने हेतु अथवा विधिपूर्वक धारण करने हेतु लोहा प्राप्त किया जाये तो शनि प्रसन्न होते हैं. शनिवार को लोहे के दान से भी शनि की प्रसन्नता होती है

शनिदेव के अशुभ प्रभावों की शांति हेतु लोहा धारण किया जाता है किन्तु यह लौह मुद्रिका सामान्य लोहे की नहीं बनाई जाती  काले घोडे की नाल (घोडे के पैरों खुरों में लोहे की अर्धचन्द्राकार वस्तु पहनाई जाती है, जो घोडे के खुरों को मजबूत बनाये रखती है, घिसने नहीं देती, वही नाल होती है), जो नाल स्वत: ही घोडे के पैरों से निकल गयी हो, उस नाल को शनिवार को सिद्घ योग ( शनिवार और पुष्य, रोहिणी, श्रवण नक्षत्र हो अथवा चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी तिथि हो) में प्राप्त की जाती है और फिर इसका उपयोग विविध प्रकार से किया जाता है

1 . यदि घर में अक्सर कैसे रहता हो या किसी ने कोई तांत्रिक क्रिया कर रही हो तो काले घोड़े की नाल मंगाकर उसे अपने घर के प्रवेश द्वार पर U के आकार में टांग दे. कुछ ही दिनों नाल अपना असर दिखाने लगेगा तथा सब कुछ फिर से सामान्य हो जाएगा

2 . यदि आप के किसी भी कार्य में कोई बढ़ा आ रही हो तो इसका रामबाण उपाय आप शनिवार के दिन विधि पूर्वक अपने दाहिने हाथ की मध्यमा ऊँगली में काले घोड़े के नाल से बने छल्ले को धारण कर ले. इस उपाय द्वारा आपके सभी बिगड़े काम बनने लगेंगे

3 . यदि काले घोड़े की नाल को एक काले कपडे में लपेट कर आप अपने तिजोरी में रख दे इससे धन में वृद्धि होती है इसी तरह काले घोड़े की नाल को काले कपडे में लपेट अनाज के बर्तन में रख दे तो अनाज में वृद्धि होती है

4 . यदि कोई व्यक्ति शनि देव की साढ़े साती से पीड़ित है तो ऐसे व्यक्ति को काले घोड़े की नाल से चार कील बनाकर पीड़ित व्यक्ति के बिस्तर के चारो कोने में लगा देने चाहिए. इससे शनि दशा से मुक्ति मिलती है

5 . यदि आपकी दुंकान अथवा व्यवसाय ढंग से न चल रहा हो या किसी व्यक्ति तांत्रिक क्रियाओ के द्वारा आपकी दूकान अथवा व्यवसाय को बाँध दिया हो तो काले घोड़े की नाल से एक कील बनाकर सवा किलो उरद की दाल में रख कर एक नारियल के साथ जल में प्रवाहित करे. इससे हर प्रकार की बाधा दूर होगी

अगर गर्भ ठहर नहीं रहा हो तो ये हैं रामबाण उपाय।

अगर बार बार आपका गर्भ गिर रहा हैं तो भी ये बहुत उपयोगी है।
यदि किसी स्त्री को लगातार दो बार गर्भपात हो चूका हैं तो अगला गर्भ गिरने की सम्भावना हो सकती हैं। ऐसे में उनको बहुत सावधानी रखनी चाहिए। क्षयग्रस्त स्त्रियां जो नाजुक, कोमल प्रकृति की होती हैं, प्राय: गर्भस्त्राव करती हैं। अगर बार बार गर्भ गिर रहा हो तो गर्भरक्षा के ये उपाय बहुत कारगार साबित हो सकते हैं, आइये जाने इन उपायो को। अगर तीन माह से पहले गर्भ गिरता हैं तो इसको गर्भस्त्राव कहा जाता हैं। जब गर्भस्त्राव होता हैं तो रक्तस्त्राव होने लगता हैं। अगर केवल रक्तस्त्राव ही होता हैं तो यह “THREATENED ABORTION” कहलाता हैं। यदि रक्तस्त्राव के साथ दर्द रहे तो गर्भस्त्राव होने की अत्यधिक सम्भावनाये होती हैं।
इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं। बचाव से पहले हम कारणों को जान ले ताकि पहले हम कारणों को दूर करले।

कारण।
निमोनिया, संक्रामक ज्वर, पुरानी बीमारिया जैसे सिफलिस, टी बी। गर्भाशय सम्बन्धी खराबी, पेट में आघात लगना, भय, मानसिक आघात, बच्चे का ठीक ढंग से विकास व् निर्माण ना होना, गर्भस्त्राव होने की प्रवृति, विटामिन ई की कमी, अंत: स्त्रावी ग्रंथियों की खराबी (थाइरोइड होना), आदि अनेक कारणों से गर्भस्त्राव होता हैं।

सावधानिया।
जिस स्त्री को गर्भस्त्राव होता हो, उसे भारी बोझा नहीं उठाना चाहिए। आराम करना चाहिए। रक्तस्त्राव तथा पेट दर्द होने पर तो पूर्ण आराम करना चाहिए। रक्तस्त्राव की स्थिति में चारपाई के पाँव की और के पायो को नीचे ईंट लगाकर ऊंची कर देनी चाहिए। जो कारण समझ में आये उन्हें दूर करना चाहिए। सहवास नहीं करना चाहिए। माँ को स्वस्थ रहना चाहिए। स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

दक्षिण भारत की औरतो का मानना हैं के पपीते में गर्भ गिराने के शक्तिशाली गुण होते हैं। इसलिए गर्भवती स्त्रियों को पपीता खाते समय सावधान रहना चाहिए।
गर्भाशय को मज़बूत करने के लिए।

लौकी
लौकी का रस या सब्जी गर्भाशय को मज़बूत करने में बहुत सहायक हैं, इसलिए जिन औरतो को बार बार गर्भस्त्राव होता हो उनको नियमित लौकी की सब्जी या रस सेवन करना चाहिए।

सिंघाड़ा।

गर्भाशय को मज़बूत करने के लिए सिंघाड़ा एक बहुत उपयुक्त फल हैं, ऐसी स्त्रियों को नियमित सिंघाड़े खाने चाहिए।
गर्भ को बचाने के आयुर्वेदिक उपाय।

धतूरे की जड़।

जिस स्त्री को बार बार गर्भपात हो जाता हो उसकी कमर में धतूरे की जड़ का चार ऊँगली का टुकड़ा ऊनी धागे से बाँध दे। इससे गर्भपात नहीं होगा। जब नौ मास पूर्ण हो जाए तब जड़ को खोल दे।

जौ का आटा।
12 ग्राम जौ के आटे को १२ ग्राम काले तिल और १२ ग्राम मिश्री पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से बार बार होनेवाला गर्भपात रुकता हैं।

अनार।
100 ग्राम अनार के ताज़ा पत्ते पीसकर, पानी में छानकर पिलाने और पत्तो का रस पेडू पर लेप करने से गर्भस्त्राव रुक जाता हैं। इसलिए ऐसी स्त्रीया जिनको अधिक गर्भपात होता हो वो अपने आस पास अनार का उचित बंदोबस्त कर के रखे।

ढाक (पलास)।
ढाक का पत्ता गर्भधारण करने में बहुत सहयोगी हैं। गर्भधारण के पहले महीने १ पत्ता, दूसरे महीने २ पत्ते, इसी प्रकार नौवे महीने ९ पत्ते ले कर १ गिलास दूध में पकाकर प्रात: सांय लेना चाहिए। ये प्रयोग जिन्होंने भी किया हैं उनको चमत्कारिक फायदा हुआ हैं। ये प्रयोग हमने आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तक औषध दर्शन से लिया हैं।

शिवलिंगी बीज चूर्ण और पुत्रजीवक गिरी।
शिवलिंगी के बीजो का चूर्ण और पुत्रजीवक की गिरी दोनों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला ले। 1 चौथाई चम्मच सुबह खाली पेट शौच के बाद और नाश्ते से पहले तथा रात्रि को भोजन के एक घंटे के बाद गाय के दूध के साथ सेवन करे। ये दोनों औषधीय आपको बाजार में किसी भी आयुर्वेद की दूकान से मिल जाएँगी या फिर रामदेव की दूकान से मिल जाएगी।
खान पान में विशेष ध्यान दे ।

विटामिन ई युक्त भोजन।
विटामिन ई हमको अंकुरित भोजन में मिलता हैं, अंकुरित दाल और अनाज इसका अच्छा स्त्रोत हैं। बादाम, पिस्ता, किशमिश और सूखे मेवे बढ़िया साधन हैं विटामिन ई के, इसलिए गर्भवती स्त्री को पर्याप्त मात्रा में विटामिन ई का सेवन करवाना चाहिए। नीम्बू नमक और पानी की शिकंजवी में विटामिन ई होता हैं इसलिए गर्भवती के लिए ये बहुत उपयोगी हैं।

गर्भपात का खतरा हो तो।
काले चने का काढ़ा।
यदि गर्भपात का भय हो तो काले चनो का काढ़ा पीना बहुत फायदेमंद हैं।

फिटकरी।
अगर गर्भपात होने लगे या ऐसा भय हो तो तुरंत पीसी हुयी फिटकरी चौथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डालकर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रुक जाता हैं। गर्भपात के समय जब जब दर्द, रक्तस्त्राव हो रहा हो तो हर दो दो घंटे से एक खुराक दे।

सौंठ मुलहठी दूध।
ऐसी स्त्री को गर्भधारण करते ही नित्य आधी चम्मच सौंठ, चौथाई चम्मच मुलहठी को २५० ग्राम दूध में उबालकर पिए। गर्भपात की अचानक सम्भावना हो जाए तो भी इसी प्रकार सौंठ पिए। इस से गर्भपात नहीं होगा। प्रसव वेदना तीव्र हो रही हो तो इसी प्रकार सौंठ पीने से वेदना कम हो जाती हैं।

दूध और गाजर

एक गिलास दूध और एक गिलास गाजर का रस मिलकर उबाले। उबलते हुए आधा रहने पर नित्य पीती रहे। गर्भपात नहीं होगा। जिनको बार बार गर्भपात होता हो, वे गर्भधारण करते ही इसका सेवन आरम्भ कर दे।

सौंफ और गुलाब का गुलकंद
जिन स्त्रियों को बार बार गर्भपात हो उनको गर्भधारण के बाद 62 ग्राम सौंफ 31 ग्राम गुलाब का गुलकंद पीसकर पानी मिलाकर एक बार नित्य पिलाना चाहिए। और पुरे गर्भकाल में सौंफ का अर्क पीते रहने से गर्भ स्थिर रहता हैं। source onlyayurved.com

होमियोपैथी दवा खाते हैं तो जरूर बरतें ये सावधानी!

होमियोपैथी पद्धति में चिकित्सक का मुख्य कार्य रोगी द्वारा बताए गए जीवन-इतिहास एवं रोग लक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करने वाली औषधि का चुनाव करना होता है। रोग लक्षण एवं औषधि लक्षण में जितनी ही अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है।

चिकित्सक का अनुभव उसका सबसे बड़ा सहायक होता है। पुराने और कठिन रोग की चिकित्सा के लिए रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। अगर आप होमियोपैथी दवाओं का सेवन करते हैं तो आपको इन प्रमुख बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है।

बरतें सावधानी
1 होम्‍योपैथिक दवाओं को कभी भी खुले में ना रखें। इन्‍हें ठंडी जगह पर रखें और दवाई खाने के बाद ढक्‍कन बंद कर के रखें।

2. खाने के लिये कभी भी दवाइयों को हथेलियों पर नहीं निकालना चाहिये, ऐसा करने से उनमें पडी़ स्पिरिट खतम हो जाएगी जो कि बहुत जरुरी चीज होती है।

3. दवाई खाने के 30 मिनट पहले और बाद तक कुछ नहीं खाना चाहिये, इस बात को हमेशा ध्‍यान में रखें।

4. अपनी जितनी भी बुरी आदत हो जैसे, शराब, सिगरेट या तंबाकू खाना, उसे तुरंत छोड़ दीजिये। इससे होम्‍योपैथी का असर कम हो जाता है।

5. आप क्‍या खाते और पीते हैं, इस बात पर ध्‍यन दें। अपने डॉक्‍टर से सलाह लीजिये कि आप क्‍या-क्‍या खा सकते हैं और क्‍या नहीं। क्‍योंकि प्‍याज, लहसुन और अदरक में बडी तेज की महक होती है जो इस दवाई का प्रभाव कम कर देते हैं।

6. होम्योपैथिक दवा को दूसरी दवाइयों के साथ मिला कर ना खाएं। एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयों को होम्‍योपैथिक दवाई के साथ नहीं मिलाना चाहिये।

7. होम्‍योपैथिक डॉक्‍टरों के अनुसार अगर आप यह दवाई ले रहे हैं तो आपको खट्टी चीजों से तौबा करनी होगी जैसे इमली आदि।

गुरुवार को नहीं करने चाहिए ये 5 काम होगी धन और संतान की हानि , जानिए क्यों?

गुरुवार धर्म का दिन होता है। ब्रह्मांड में स्थित नौ ग्रहों में से गुरु वजन में सबसे भारी ग्रह है। यही कारण है कि इस दिन हर वो काम जिससे कि शरीर या घर में हल्कापन आता हो। ऐसे कामों को करने से मना किया जाता है क्योंकि ऐसा करने से गुरु ग्रह हल्का होता है। यानी कि गुरु के प्रभाव में आने वाले कारक तत्वों का प्रभाव हल्का हो जाता है। गुरु धर्म व शिक्षा का कारक ग्रह है। गुरु ग्रह को कमजोर करने से शिक्षा में असफलता मिलती है। साथ ही धार्मिक कार्यों में झुकाव कम होता चला जाता है।

गुरुवार को किए गए ये कार्य रोकते हैं पति, संतान की उन्नति
शास्त्रों में गुरुवार को महिलाओं को बाल धोने से इसलिए मनाही की गई है। क्योंकि महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक होता है। इस प्रकार अकेला बृहस्पति ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी होती है। इसी कारण से इस दिन बाल भी नहीं कटवाना चाहिए जिसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है। उनकी उन्नति बाधित होती है।

गुरुवार को नहीं करना चाहिए नेल कटिंग और शेविंग भी
शास्त्रों में गुरु ग्रह को जीव कहा गया है। जीव मतलब जीवन। जीवन मतलब आयु। गुरुवार को नेल कटिंग और शेविंग करना गुरु ग्रह को कमजोर करता है। जिससे जीवन शक्ति दुष्प्रभावित होती है। उम्र में से दिन कम करती है।

बृहस्पति को किस तरह कमजोर करते है घर में किए गए ये कार्य
जिस प्रकार से बृहस्पति का प्रभाव शरीर पर रहता है। उसी प्रकार से घर पर भी बृहस्पति का प्रभाव उतना ही अधिक गहरा होता है। वास्तु अनुसार घर में ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है। घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना। घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है।

ये दिन है लक्ष्मी प्राप्ति का इसलिए देवी लक्ष्मी भी होती है प्रभावित
गुरुवार लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन जीवन में खुशियों की अपार वृद्धि कराने वाला होता है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण की एक साथ पूजन करने से पति- पत्नी के बीच कभी दूरिया नहीं आती है। साथ ही धन की वृद्धि होती है।

रूक सकता है प्रमोशन भी
जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में रुकावटें आती है।


गुरु ग्रह का कमजोर होना किस तरह करता है धन की कमी
किसी भी जन्मकुंडली में दूसरा और ग्यारहवां भाव धन के स्थान होते हैं। गुरु ग्रह इन दोनों ही स्थानों का कारक ग्रह होता है। गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। धन लाभ की जो भी स्थितियां बन रही हों। उन सभी में रुकावट आने लगती है। सिर धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जा सकती हो। ये सभी काम गुरुवार को करना धन हानि का संकेत हैं। तरक्की को कम करने का संकेत हैं।

अगर आपके घर में भी CFL है तो ये जानकारी आपके लिए ही है ! Dangers of CFL Bulbs

 यह तस्वीर कनाडा के रहने वाले स्मिथ की है जिनका पैर अब काटा जाना है। इन्हें CFL बल्ब का इस्तेमाल या यूँ कहें कि इस्तेमाल में की गई लापरवाही बहुत भारी पड़ी। यह तो हम सब जानते हैं कि CFL बल्ब कितनी बिजली बचाते हैं लेकिन ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि इन बल्बों में पारा पाया जाता है जो कि शरीर में चले जाने पर बहुत ही घातक साबित होता है। स्मिथ ने ऐसे ही एक बल्ब के ठन्डे होने का इंतज़ार नहीं किया और उसे होल्डर से निकालकर बदलने की कोशिश करते हुए उसे ज़मीन पर गिरा दिया।

ज़मीन पर गिरते ही बल्ब टूट गया और कांच के टुकड़े बिखर गए। स्मिथ नंगे पैर थे और अंधेरे में उनका पैर कांच के एक टुकड़ेपर पड़ गया और बल्ब में उपस्थित पारा घाव के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर गया। उन्हें 2 महीने में ICU में रखा गया और अब उन्हें अपने पैर को खो देने का डर है। CFL के संबंध में पारा ही एक ख़तरा नहीं है, कई और भी मसले हैं, लेकिन उसके बारे में स्वास्थ्य संजीवनी पर फ़िर कभी चर्चा करेंगे, आज जानना ज़रूरी है कि CFL के टूट जाने पर क्या करें-1) कभी भी तुरंत CFL ना बदलें। उसके ठन्डे होने का इंतज़ार करें।

2) CFL टूट जाने पर तुरंत कमरे से निकल जाएं, ध्यान रखें कि पैर कांच के टुकड़े पर ना पड़ जाए।

3) पंखे एसी इत्यादि बंद कर दें जिससे पारा फैल ना सके।

4) कम से कम १५-२० मिनट बाद कमरे में प्रवेश करके टूटे हुए कांच को साफ़ करें। पंखा बंद रखें और मुंह को ढक कर रखें, दस्ताने पहने और कार्डबोर्ड की मदद से कांच समेटें, झाड़ू का इस्तेमाल ना करें क्यूंकि इससे पारे के फ़ैलने का डर रहता है। कांच के बारीक कण टेप की मदद से चिपका कर साफ़ करें।

5) कचरा फेंकने के बाद साबुन से हाथ धोना ना भूलें।

6) यदि कारणवश चोट लग जाए तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं और उसे चोट के बारे में सारी जानकारी दें।

सीसे और आर्सेनिक से भी कहीं अधिक ज़हरीला और घातक पारा होता है। इसलिए CFL का प्रयोग करते समय बहुत सावधानी रखें।

इस जानकारी को अधिक से अधिक शेयर करें तथा अपने परिचितों को भी बताएं ताकि कोई अन्य ऐसी दुर्घटना के चपेट में ना आए।

सिर्फ 30 सेकंड में हो सकेगी डेंगू की जांच, खर्च आएगा महज 15 रुपये

आने वाले समय में डेंगू की जांच के बाद परिणाम के लिए लोगों को घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आइआइटी, दिल्ली में तैयार की जा रही सेंसर आधारित सिल्वर नैनो वायर किट से जांच का परिणाम महज 30 सेकंड में मिल जाएगा।

आइआइटी, दिल्ली के बायोकेमिकल विभाग के प्रोफेसर प्रशांत मिश्र और भौतिकी के प्रोफेसर जेपी सिंह मानव संसाधन विकास मंत्रालय की इमप्रिंट इंडिया योजना के तहत सेंसर आधारित सिल्वर नैनो वायर किट तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं।

प्रोफेसर जेपी सिंह ने बताया कि पीसीआर आधारित डेंगू की जांच से परिणाम आने में काफी समय लग जाता है और उसके नतीजे भी सटीक नहीं होते हैं। सेंसर आधारित नैनो वायर किट से जांच के नतीजे 30 सेकंड में मिल जाएंगे। यह डेंगू बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान करने में सक्षम है।

उन्होंने बताया कि इसके लिए एक छोटी सी मशीन भी तैयार की जा रही है, जिसे रामा बेस्ड इंस्टूमेंट नाम दिया गया है। इसकी खास बात यह है कि इसे जेब में रखकर मच्छरजनित बीमारियों से संक्रमित जगहों पर ले लाया जा सकता है, जहां सिल्वर नैनो वायर किट के साथ जांच में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि इमप्रिंट इंडिया योजना में देश भर के 60 प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं। इसमें उनका भी प्रोजेक्ट है। इसे पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से अप्रैल से वित्तीय मदद मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके बाद उन्हें प्रोजेक्ट को पूरा करने में तकरीबन दो साल लगेंगे।

15 रुपये होगी कीमत

प्रोफेसर सिंह ने कहा कि इसका एक बार ही प्रयोग हो सकेगा। बेहतर परिणाम आने के बाद इसे बाजार में उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा सकता है। इसकी कीमत तकरीबन 15 रुपये होगी।