25 मई अमावस्या के दिन 1 सिक्का और सुपारी कर देगी कमाल


25 मई अमावस्या के दिन 1 सिक्का और सुपारी कर देगी कमाल |

25 मई अमावस्या के दिन 1 सिक्का और सुपारी कर देगी कमाल

घर के इस जगह रख ऐसे छोड़े 5 हल्दी की गाँठ !! फिर देखें चमत्कारी रूप से होगी अन्न और धन मे वृद्धि !!

शास्त्रों में ऐसा माना चाहता है अगर किसी व्यक्ति को अपने अंदर आध्यात्मिक ताकत का उदय करना है तो बृहस्पति देव की पूजा करें ।बृहस्पति देव की पूजा करने से व्यक्ति को विद्या बुद्धि सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

और देव गुरु बृहस्पति को गुरुवार का दिन समर्पित है अर्थात गुरुवार के दिन कुछ विशेष कार्य करने से आप गुरु बृहस्पति को खुश कर सकते है । आज हम आपको हल्दी के कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिनको आप करके आप अपने जीवन के सभी कष्टों का समाधान कर सकते हैं तो आईए जानते हैं।

1.आगर आप पैसों की कमी से परेशान है तो जलकुंभी और 5 हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी में रख लें ऐसा करने से आपके घर में काफी बढ़ोतरी होगी।

2. अगर परिवार में किसी के विवाह में बाधा आ रही है तो बृहस्पति देव के समक्ष घी का दीपक जलाएं इसके पश्चात हल्दी का तिलक लगाकर पीले फूल और केसर से बनी मिठाई अर्पित करें।

काले घोड़े की नाल का ये रामबाण उपाय, कर देगा आपको मालामाल !

हमारे हिन्दू धर्म में प्रकृति को मनुष्य के जीवन की गहराई में पिरोया गया है तथा यदि हम ग्रहों की बात करे तो ज्योतिष विद्या जैसे अत्यंत प्राचीन शास्त्र के अंतर्गत यह उल्लेखित किया किया गया है की सौरमंडल की चाल, गति, दशा और बैठकी ही मनुष्य के जीवन को संचालित कर रहे है.

यु तो हमारे जीवन  पर सभी नौ ग्रह अपनी-अपनी तरह से प्रभाव दर्शाकर हमारे भविष्य और वर्तमान को प्रभावित करते हैं. लेकिन इन सभी में से अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावी माना गया है तो वह शनि ग्रह.

शनि देव न्याय के देवता कहलाते है शनि देव को प्रसन्न कर, उनकी कृपा प्राप्त करने का उपाय ज्योतिष शास्त्र में मौजूद हैं. इनमें सबसे प्राथमिक और असरदार उपाय है काले घोड़े की नाल का .

ghode ki naal in english –  इसे  black horse naal भी कहते हैं या फिर black horse shoe.

यह सिर्फ शनि देव को प्रसन्न करने ही नहीं बल्कि अन्य समस्याओ एवम धन प्राप्ति से सम्बन्धित उपायो में भी काम आता है.

वास्तु शास्त्र में भी काले घोड़े की नाल को शुभ बतलाया गया है, माना जाता है की काले घोड़े के पैरो में शनि देव का प्रभाव होता है.
कहते हैं कि शनि को लोहा प्रिय है, किन्तु शनिवार को लोहा घर में नहीं लाया जाता. जिस धातु को शनि सर्वाधिक पसंद करते हैं, उसी धातु का घर में शनिवार को आना पीड़ादायक और कलहकारक सिद्ध होता है.

ऐसा तभी होता है जबकि निजी उपयोग के लिए शनिवार को लोहा खरीदा जाये या घर में लाया जाये, लेकिन पूजा करने हेतु अथवा विधिपूर्वक धारण करने हेतु लोहा प्राप्त किया जाये तो शनि प्रसन्न होते हैं. शनिवार को लोहे के दान से भी शनि  प्रसन्न होते  है.

शनिदेव के अशुभ प्रभावों की शांति हेतु लोहा धारण किया जाता है किन्तु यह लौह मुद्रिका सामान्य लोहे की नहीं बनाई जाती जैसा की आजकल एकोम्मेर्स पोर्टल द्वारा black horse shoe online कह कर sale की जा रही हैं.  .

काले घोडे की नाल (घोडे के पैरों खुरों में लोहे की अर्धचन्द्राकार वस्तु पहनाई जाती है, जो घोडे के खुरों को मजबूत बनाये रखती है, घिसने नहीं देती, वही नाल होती है जिसे black horse shoe kada के नाम से भी आप जानते होगे), जो नाल स्वत: ही घोडे के पैरों से निकल गयी हो, उस नाल को शनिवार को सिद्घ योग ( शनिवार और पुष्य, रोहिणी, श्रवण नक्षत्र हो अथवा चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी तिथि हो) में प्राप्त की जाती है और फिर इसका उपयोग विविध प्रकार से किया जाता है.

यदि घर में अक्सर कलेश रहता हो या किसी ने कोई तांत्रिक क्रिया कर रखी हो तो काले घोड़े की नाल मंगाकर को  अपने घर के प्रवेश द्वार पर U के आकार में टांग दे. कुछ ही दिनों नाल अपना असर दिखाने लगेगा तथा सब कुछ फिर से सामान्य हो जाएगा.

जिस तरह काले घोड़े की नाल बहुत फायदेमंद है उसी तरह kale ghode ki naal ki ring भी जीवन की कई समस्याओ से मुक्ति दिला सकती है. लेकिन  ghode ki naal ki vidhi का पालन करना बहुत जरुरी है.

यदि आप के किसी भी कार्य में कोई बाधा आ रही हो तो इसका रामबाण उपाय आप शनिवार के दिन विधि पूर्वक अपने दाहिने हाथ की मध्यमा ऊँगली में काले घोड़े के नाल से बने छल्ले को धारण कर ले. इस उपाय से  आपके सभी बिगड़े काम बनने लगेंगे.

यदि काले घोड़े की नाल को एक काले कपडे में लपेट कर आप अपने तिजोरी में रख दे इससे धन में वृद्धि होती है इसी तरह काले घोड़े की नाल को काले कपडे में लपेट अनाज के बर्तन में रख दे तो अनाज में वृद्धि होती है.

यदि कोई व्यक्ति शनि देव की साढ़े- साती से पीड़ित है तो ऐसे व्यक्ति को काले घोड़े की नाल से चार कील बनाकर पीड़ित व्यक्ति के बिस्तर के चारो कोने में लगा देने चाहिए. इससे शनि दशा से मुक्ति मिलती है.

यदि आपकी दुंकान अथवा व्यवसाय ढंग से न चल रहा हो या किसी व्यक्ति तांत्रिक क्रियाओ के द्वारा आपकी दूकान अथवा व्यवसाय को बाँध दिया हो तो काले घोड़े की नाल से एक कील बनाकर सवा किलो उरद की दाल में रख कर एक नारियल के साथ जल में प्रवाहित करे. इससे हर प्रकार की बाधा दूर होगी.

ध्यान रहे अगर आप black horse naal खरीदने का मन बना चुके हैं तो इसे खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर ले की यह काले घोड़े की नाल हों जिसे  उसके पैरो से निकला  गया  हों क्युकी इसकी बढती मांग के कारण बाज़ार में नकली black horse ring सस्ते दामो पर black horse shoe for sale के बड़े-2 पोस्टर लगा कर बेचीं जा रही हैं जिनसे आप को कोई लाभ नहीं होगा बल्कि हानि ही होगी.

इन पांच लोगो के घरो में कभी नहीं रूकती माँ लक्ष्मी एक कहीं आप भी इनमे से तो नहीं !!

आप ज्यादा मेहनत करते हैं लेकिन मेहनत के बावजूद भी आपको फल प्राप्त नहीं होता है आपकी धन संबंधी परेशानियां बनी रहती है तो इसके पीछे सबसे मुख्य कारण यह भी हो सकता है की आपके घर से मां लक्ष्मी रूठ गई।तो कौन सी ऐसी चीज है जिनको करने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती है।

जो लोग अपने घर में देवताओं पितरों और मेहमानों का मान सम्मान नहीं करते है ऐसे लोगों के घरों में लक्ष्मी कभी नहीं रुकती है।इसके अलावा जो लोग झूठ बोलते हैं या फिर किसी के खिलाफ झूठी गवाही देते हैं ऐसे लोगों के घरों में भी मां लक्ष्मी कभी भी निवास नही करती है।

ऐसे पति पत्नी जो एक दूसरे से प्यार नहीं करते और किसी दूसरे पर पूरी नजर डालते हैं ऐसे व्यक्ति के घर में भी कभी बरकत नहीं हो पाती ।जो लोग नास्तिक होते हैं आस्था को अंधविश्वास समझते हैं हमेशा हिंसा में विश्वास रखते हैं।

ऐसे लोगों के घरों में भी देवी लक्ष्मी निवास नहीं करती है।इसके साथ-साथ जंगलों में महिलाएं बहुत गुस्से करने वाले होती है घमंडी होती है यहां भी महालक्ष्मी कभी नहीं रुकती है ।जिस घर में हमेशा कलह का वातावरण होता है लोग एक दूसरे के प्रति बुरी भावना रखते हैं एक दूसरे की संपत्ति हड़पना चाहते हैं मां लक्ष्मी ऐसे लोगों से हमेशा नाराज रहती है और ऐसे लोगों के घरों में कभी नहीं टिकते।

अगर आप इस कूल कूल तेल का इस्तेमाल करते है तो जरूर पढ़े ये खबर

यूँ तो सेलेब्रिटीज़ आये दिन बहुत सी चीजों को लेकर विज्ञापन करते रहते है, पर क्यूकि आज कल गर्मियों का मौसम चल रहा है, तो ऐसे में सबसे मशहूर विज्ञापन बालो के तेल यानि वो तेल जो आपके सिर दर्द को दूर भगाता है और जिससे आपको ठंडा महसूस होता है, वही टीवी पर ज्यादातर देखने को मिल रहा है. अब इसमें कोई शक नहीं, कि गर्मियों में धूप की वजह से सबसे पहले सिर दर्द की परेशानी ही हमारे सामने आती है. ऐसे में हम इस ठंडे ठंडे तेल का इस्तेमाल करते है. वही हम में से कुछ लोग ऐसे है, जो बिना इसके बारे में जाने ही इसका इस्तेमाल कर रहे है. दरअसल आज हम इस तेल की बात इसलिए कर रहे है, क्यूकि इस तेल को लेकर बीएचयू के इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की तरफ से केंद्र सरकार को जो रिपोर्ट भेजी गयी है, वो बेहद चौकाने वाली है|

रिपोर्ट में सिरदर्द, थकान और अनिद्रा भगाने के नाम पर बाजार में बेचे जा रहे इस ठंडे तेल को घातक बताया गया है. इसके इलावा आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर तेल में कपूर के जरूरत से ज्यादा प्रयोग से आंखों की रोशनी कम होने के साथ साथ ब्रेन में सूजन और कई तरह की बीमारिया भी सामने आ रही हैं|

केवल इतना ही नहीं इसके साथ ही यह हेरोइन यानि नशा और शराब की तरह लोगो पर अपना बुरा असर दिखा रहा है. फ़िलहाल आईएमएस के न्यूरॉलजी विभाग के प्रोफेसर विजय नाथ मिश्र और उनकी पूरी टीम कपूर मिश्रित इस ठंडे तेल का प्रयोग करने वालों पर इसके प्रभाव का पता लगाने में जुटी हुई है. इसके इलावा सर सुंदरलाल हॉस्पिटल की न्यूरॉलजी ओपीडी में आने वाले पूर्वांचल और बिहार के उन तमाम 500 मरीजों के केस की स्टडी की गई जो अब तक ठंडे तेल का प्रयोग करते रहे हैं. बता दे कि करीब दो साल की ऑब्जरवेशन के बाद अब इसकी रिपोर्ट सामने आ चुकी है. गौरतलब है, कि कूल कूल का एहसास दिलाने वाले इस तेल से फ़ैल रही बीमारियों को महामारी का नाम दिया गया है.

वही प्रोफेसर मिश्र ने बताया कि ऑब्जर्वेशन की रिपोर्ट केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी को भेजकर डिटेल रिसर्च और कपूर के प्रयोग की मात्रा भी निर्धारित करने की जरूरत है. इसके साथ ही इसकी केस स्टडी से यह बात सामने आ चुकी है, कि इस तेल के लगातार प्रयोग से दिमाग की नसे कमजोर और शिथिल हो रही है. ऐसे में इसका सीधा असर ब्रेन पर पड़ने से हाइपर टेंशन. आँखों की रौशनी कम होना और आगे चल कर स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ रहा है. ये स्थिति इंसान के लिए मौत का कारण भी बन सकती है. शायद यही वजह है, कि सलाह के बाद जिन मरीजों ने इस ठंडे तेल का इस्तेमाल करना बंद कर दिया, उन्हें दवा के बिना ही धीरे धीरे राहत मिल रही है.

वैसे अगर रिपोर्ट की माने तो इस तेल का ज्यादा प्रयोग ग्रामीण इलाके की महिलाओ द्वारा किया जाता है. इसका कारण यह है, कि घर की देख रेख, बच्चो की परवरिश और खेती किसानी के कामो के चलते ये महिलाएं इतनी थक जाती है, कि तनाव की वजह से इन्हे सिर दर्द होने लगता है. ऐसे में राहत पाने के लिए इस ठंडे तेल का इस्तेमाल जैसे एक फैशन की तरह ही किया जा रहा है. यहाँ तक कि स्थिति अब ऐसी हो गयी है, कि महिलाएं ये तेल लगाए बिना अब एक दिन भी नहीं रह सकती. यदि एक तरह से देखा जाए तो ये महिलाएं इस नशे की आदि हो चुकी है. ऐसे में यह महिलाओ के लिए एक खतरनाक संकेत है.

इसके इलावा रिपोर्ट के अनुसार बाजार में सौ से ज्यादा तेल कूल कूल के नाम से बिक रहे है. दरअसल इस ठंडा कूल तेल की कम्पनियो के निर्माता अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए इसमें जरूरत से ज्यादा कपूर का इस्तेमाल कर रहे है. बता दे कि अमेरिका जैसे देश में कपूर की मात्रा निर्धारित की गयी है, पर भारत देश में अब तक ऐसा कोई नियम नहीं बना है. अमेरिका में किसी भी उत्पाद में ग्यारह फीसदी से ज्यादा कपूर का प्रयोग करने पर बैन है. वही भारत में कई गुणा ज्यादा कपूर तेल में मिलाया जा रहा है.

वैसे प्रोफेसर मिश्र के अनुसार कपूर फायदेमंद जरूर है, पर केवल तब जब इसे कम मात्रा में इस्तेमाल किया जाए. अगर इसकी मात्रा ज्यादा हो जाए तो यह स्किन के जरिये शरीर में पहुँच कर उस पर बुरा प्रभाव डालता है. इसलिए केंद्र सरकार को इसका मानक निर्धारित करना चाहिए. वही ठंडे तेल का इस्तेमाल करने से सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, कम दृष्टि, ब्रेन अटैक, कार्पल टर्नर सिंड्रोम, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और कई अन्य बीमारियों की संभावना रहती है. इसके साथ ही बीएचयू के रस शास्त्रक विभाग के प्रोफेसर आनंद चौधरी के मुताबिक कपूर की अधिक मात्रा नाड़ी तंत्र की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है. जिसके चलते कपूर मिश्रित इस तेल का प्रयोग करने वालों को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं. ऐसे में आप भी जरा सावधानी से काम ले.

घरेलू नुस्खा, जिसके इस्तेमाल से आपका लीवर बिलकुल नए जैसा हो जाएगा

लीवर ख़राब होने के लक्षण
  1. – लीवर ख़राब होने से मुंह में अमोनिया ज़्यादा रिसता है, जिससे मुंह से बदबू आती है।
  2. – त्‍वचा क्षतिग्रस्‍त होने लगती है, ख़ासकर आंखों के नीचे की त्‍वचा सबसे पहले प्रभावित होती है। त्‍वचा पर थकान साफ़ नज़र आने लगती है। त्‍वचा का रंग उड़ जाता है और कभी-कभी सफेद धब्‍बे दिखाई पड़ते हैं, इन्‍हें लीवर स्‍पॉट कहा जाता है।
  3. – कभी-कभी जब लीवर पर वसा जम जाता है तो पानी भी नहीं पचता है।
  4. – मल-मूत्र में हमेशा हरापन लीवर ख़राब होने का संकेत है। यदि यह कभी-कभार हो तो स‍मझिए लीवर ख़राब नहीं है बल्कि पानी की कमी से ऐसा हुआ।
  5. – यदि पीलिया रोग हो गया है तो इसका मतलब कि लीवर में गड़बड़ी आ गई है।
  6. – लीवर से स्रवित होने वाला एंजाइम बाइल का स्‍वाद कड़वा होता है, जब मुंह में कड़वापन आने लगे तो समझ लेना चाहिए कि लीवर में कुछ गड़बड़ी आ गई है और बाइल मुंह तक आ रहा है।
  7. – पेट में सूजन आने का मतलब लीवर बड़ा हो गया है।

आज हम आपको एक ऐसा घरेलू नुस्खा बताने जा रहे है जिसके इस्तेमाल से आपका लीवर बिलकुल नए जैसा हो जाएगा | आइये जानते है इस चमत्कारी नुस्खे के बारे में |

सामग्री :-
    मुठी भर पुदीने की पत्तियां
    1/3 कप नींबू का रस
    ½ संतरे का रस
    1 कप पानी
    शहद (स्वाद के लिए )

विधि :-

    पानी को उबालने के लिए आग पर रखें |
    जब पानी उबलने लगे तो इसमें पुदीने की पत्तियां डाल कर 5 मिनटों तक उबालें |
    अब इस मिश्रण को 10 मिनटों तक ठंडा होने दें |
    अब इसमें नींबू का रस , संतरे का रस और शहद डाल कर मिक्स करें और आपकी ड्रिंक तयार है |

इस ड्रिंक के सेवन से आपका लीवर तंदरुस्त हो जाएगा | और साथ ही साथ शरीर के कई और रोग भी मिट जाएगे |

हर्निया के रोगियों के लिए वरदान है पोस्ट, बस करना है ये आसान सा उपाय

लंबे समय से खांसते रहने या लगातार भारी सामान उठाने से भी पेट की मांसपेशियां(Muscles)कमजोर हो जाती है ऐसी स्थिति में हर्निया(Harniya)की संभावना बढ़ जाती है इसके कोई खास लक्षण नहीं होते हैं लेकिन कुछ लोग सूजन और दर्द का अनुभव करते हैं जो खड़े होने पर और मांसपेशियों में खिंचाव होने या कुछ भारी सामान उठाने पर बढ़ सकता है

ये समस्या जन्मजात भी हो सकती है इसे कॉनजेनाइटल हर्निया कहते हैं हर्निया एक वक्त के बाद किसी को भी हो सकता है और बिना सर्जरी के ठीक भी नहीं हो सकता इसमें पेट की त्वचा के नीचे एक असामान्य उभार आ जाता है जो नाभि के नीचे होता है आंत का एक हिस्सा पेट की मांसपेशियों के एक कमजोर हिस्से से बाहर आ जाता है इसके अलावा इंगुइंल हर्निया, फेमोरल हर्निया, एपिगास्त्रिक हर्निया, एम्ब्लाइकल हर्निया भी होता है जो बहुत कम दिखता है

प्रारम्भिक अवस्था की हर्निया की बीमारी में कपड़ा या बेल्ट बांधकर धीरे धीरे प्राणायाम करें धीरे धीरे प्राणायाम करने से हर्निया में लाभ होता है बाह्य प्राणायाम  सबसे अधिक लाभदायक होता है- पूरा श्वास बाहर निकालकर कुछ क्षण  पेट को ऐसे ही रखें  फिर धीरे धीरे श्वास अन्दर लें तथा पीछे झुकने वाले आसन न करें

एक योग बनाएं-

    अमरुद के पत्ते- चार-पांच
    युक्लिप्ट्स के  पत्ते- चार या पांच
    आम के  पत्ते- चार या पांच

इन सभी को मिलाकर कूटकर इनका काढ़ा पीयें  इससे आँतों की झिल्ली मजबूत हो जाती है
  •      कांचनार गुग्ग्लु या वृद्धि बाधिका वटी और सर्वक्ल्प क्वाथ आदि का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन ज्यादा हर्निया बढने पर आपरेशन ही करना पड़ता है
  •     यदि हर्निया के लक्षण पता लगे तो आप उसे घरेलू इलाज से कम कर सकते हैं हालांकि इन घरेलू उपायों से सिर्फ प्राथमिक इलाज ही संभव है और इसे आजमाने पर कभी उल्टे परिणाम भी हो सकते हैं इसलिए घरेलू इलाज आजमाने से पहले डॉक्टर से जरुर संपर्क कर लें
  •     मार्श मैलो(Marshmallow)एक जंगली औषधि है जो काफी मीठी होती है इसके जड़ के काफी औषधीय गुण हैं यह पाचन को ठीक करता है और पेट-आंत में एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है हर्निया में भी यह काफी आराम पहुंचाता है
  •     बबूने का फूल(Chamomile)पेट में हर्निया आने से एसिडिटी और गैस काफी बनने लगती है इस स्थिति मेंम बबूने के फूल के सेवन से काफी आराम मिलता है यह पाचन तंत्र को ठीक करता है और एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है
  •     अदरक के जड़(Ginger Root)पेट में गैस्ट्रिक एसिड और बाइल जूस से हुए नुकसान से सुरक्षा करता है यह हर्निया से हुए दर्द में भी काम करता है
  •     हर्निया के दर्द में एक्यूपंक्चर काफी आराम पहुंचाता है खास नर्व पर दबाव से हर्निया का दर्द कम होता है
  •     मुलैठी (Licorice)कफ, खांसी में मुलैठी तो रामबाण की तरह काम करता है और आजमाय हुआ भी है हर्निया के इलाज में भी अब यह कारगर साबित होने लगा है खासकर पेट में जब हर्निया निकलने के बाद रेखाएं पड़ जाती है तब इसे आजमाएं
  •     बर्फ से हर्निया वाले जगह दबाने पर काफी आराम मिलता है और सूजन भी कम होती है यह सबसे ज्यादा प्रचलन में है
  •     हावथोर्निया(Hawthornia)एक हर्बल सप्लीमेंट है जो पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और पेट के अंदर के अंगों की सुरक्षा करती है यह हर्निया को निकलने से रोकने में काफी कारगर है हावथोर्निया में Citrus Seed, Hawthorn और Fennel मिली होती है

अगर आप भी खाते हैं मृत्‍युभोज तो अगली बार खाने से पहले जरूर जान लें ये बातें

अक्‍सर आपने देखा होगा कि हिंदु धर्म में किसी परिवार के सदस्‍य की अगर मृत्‍यु हो जाती है तो उस परिवार को भोज देना होता है जिसे मृत्‍यु भोज कहा जाता है। ये समाज में रह रहे हर व्‍यक्ति के लिए आवश्‍यक होता है। समाज की ये परंपरा हर किसी को निभानी पड़ती है चाहे वो व्‍यक्ति अमीर हो या गरीब उसे ये भोज देना ही पड़ता है।

लेकिन इस प्रथा के पीछे एक पौराणिक कहानी का भी उल्लेख महाभारत में मिलता है। बताया गया है कि एक बार श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जाकर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया, तो दुर्योधन ने इस आग्रह को ठुकरा दिया। इससे श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह वापस जाने लगे। तभी दुर्योधन ने कृष्ण से भोजन करने का किया फिर लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो तो ऐसी स्थिति में भोजन कभी नहीं करना चाहिए।

वैसे तो हिन्दू धर्म में 16 संस्कार हैं, जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान व अन्तिम संस्कार अंत्येष्टि है। इस तरह से जब 17 वां संस्कार बनाया ही नहीं गया तो सत्रहवाँ संस्कार तेरहवीं संस्कार कहाँ से आ गया। ये समाज के दिमाग की उपज है। बता दें कि किसी भी धर्म में मृत्युभोज का विधान नहीं है। बल्कि महाभारत में लिखा गया है कि मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

आपने देखा होगा कि जानवरों में अगर उसका साथी बिछुड़ जाता है तो वह उस दिन चारा नहीं खाता है। जबकि इस संसार में सर्वश्रेष्ठ मानव युवा व्‍यक्ति की मृत्यु पर भी हलुवा पूड़ी खाकर शोक मनाने का ढ़ोंग रचता है। इससे बढ़कर निन्दनीय कोई दूसरा कृत्य हो नहीं सकता।

हाथ और पैर की मोच को दूर करने के लिए अपनाएँ ये घरेलु उपाय दिखेगा तुरंत असर

 कभी-कभी पैर गड्ढे में आने पर पैर में मोच आ जाती है या चलने-चलते हाथ-पैर मुड़ जाने या चोट लग जाने के कारण मोच आ जाती है। बच्चे जब पहली बार साइकिल चलाना सिखते हैं या स्कूल में ऐन्यूअल स्पोर्ट्स डे होता है तब पैर या हाथ में मोच आना  जैसे लाज़मी हो जाता है। फिर जन्माष्टमी के अवसर पर दही-हांडी के अवसर पर मोच आने, चोट लगने, पैर-हाथ में सूजन नहीं आया तो दही हांडी क्या फोड़ा, हैं न! लेकिन तब घर पर माँ ही क्या हालत होती है, उसका सबसे पहला काम होता है दर्द से तड़पते बच्चे को आराम पहुँचाना।

    उस वक्त सालों से चली आ रहा है दादी-नानी माँ का नुस्ख़ा ही सबसे पहले आजामाया जाता है। मुझे याद है मैं जब पहली बार साइकिल चलाना सीखते हुए गिर गई थी तो माँ ने अपने घरेलू उपचार और अपने प्यार भरे स्पर्श से मिनटों में मेरा दर्द दूर करके होठों पर मुस्कान ला दिया था। मैं अपने इस राहत भरे मुस्कान के पीछे के राज को आप सब से शेयर करना चाहती हूँ ताकि आप भी इसी तरह अपने बच्चे के होंठो पर मुस्कान ला पायें।

विभिन्न औषधियों से उपचार :

1)  अगर आपके पैर या हाथ में मोच आ गई  है तो बिना देर किए थोड़े-से बर्फ एक कपड़े में रखकर सूजन वाले जगह पर लगायें इससे सूजन कम हो जाता है। बर्फ लगाने से सूजन वाले जगह पर रक्त का संचालन अच्छी तरह से होने लगता है जिससे दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।
2)  अगर मोच आने के साथ थोड़ा-सा छिल गया है तो आप सबसे पहले एक कटोरी में पाँच-छह चम्मच सरसों का तेल लें। उसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी पाऊडर या कच्चा हल्दी का पेस्ट लें और चार-पाँच लहसुन का फाँक पीसकर डालने के बाद धीमी आंच में कुछ देर रखें। उसके बाद मोच पर धीरे-धीरे इस तेल से मसाज़ करें। फिर देखें इस तेल का जादू। सरसों और हल्दी का एन्टी-इन्फ्लैमटोरी और एन्टी-फंगल गुण दोनों सूजन और घाव को ठीक होने में मदद करता है।
3) आप एक कटोरी या पैन में दो चम्मच हल्दी और एक चम्मच चूना लें (अनुपात लगभग ऐसा होना चाहिए)। फिर उसको अच्छी तरह से फेंटकर धीमी आंच में एक-दो मिनट रखने के बाद उतार दें और गुनगुना गर्म अवस्था में मोच वाले जगह पर लगायें। जब तक न सूखे निकालें नहीं, सूखने के बाद गुनगुने गर्म पानी से धो लें। आपको कुछ देर में आराम मिलने लगेगा। जब तक तक दर्द कम हो नियमित रूप से इस लेप को दिन में दो बार लगा सकते हैं। इसको लगाने के बाद जगह पर ज्यादा हिलाये-डुलाये नहीं। हल्दी का एन्टी-इन्फ्लैमटोरी गुण सूजन को कम करने में बहुत मदद करता है।
4) तुलसी का पौधा तो हर घर में मिलता है। चोट लगने पर तुरन्त तुलसी की कुछ पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसको चोट वाले स्थान पर लगायें। तुलसी का औषधिय गुण अपना चमत्कार दिखायेगा।
5) दर्द चोट लगने का हो या मोच लगने का, हल्दी-दूध पीना न भूलें। यह दर्दनिवारक या पेनकिलर जैसा काम करता है।
नोट- यह सारे घरेलू उपचार हैं अगर दर्द फिर भी कम नहीं हो रहा है तो डॉक्टर के पास जाने में देर न करें।

किडनी में खराबी हो या किडनी की सूजन बस ठीक करे कुछ ही दिन मे इस घरेलु उपाय से

कभी-कभी गुर्दे में खराबी के कारण गुर्दे (वृक्क) अपने सामान्य आकार से बड़े हो जाते हैं और उसमें दर्द होता है। इस तरह गुर्दे को फूल जाने को गुर्दे की सूजन कहते हैं। इसमें दर्द गुर्दे के स्थान से चलकर कमर तक फैल जाता है।

गुर्दे में खराबी के लक्षण :
        गुर्दे रोगग्रस्त होने से रोगी का पेशाब पीले रंग का होता है। इस रोग से पीड़ित रोगी का शरीर भी पीला पड़ जाता है, पलके सूज जाती हैं, पेशाब करते समय कष्ट होता है, पेशाब रुक-रुककर आता, कभी-कभी अधिक मात्रा में पेशाब आता, पेशाब के साथ खून आता है और पेशाब के साथ धातु आता (मूत्रघात) है। इस रोग से पीड़ित रोगी में कभी-कभी बेहोशी के लक्षण भी दिखाई देते हैं।
विभिन्न औषधियों से उपचार-

1) मूली :

    गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बन्द हो गया हो तो मूली का रस 20-40 मिलीलीटर दिन में 2 से 3 बार पीना चाहिए।
    पेशाब में धातु का आना (मूत्राघात) रोग में मूली खाना लाभकारी होता है।
    मूली के पत्तों का रस 10-20 मिलीलीटर और कलमीशोरा का रस 1-2 मिलीलीटर को मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब साफ आता है और गुर्दे की सूजन दूर होती है।
    प्रतिदिन आधा गिलास मूली का रस पीने से पेशाब के समय होने वाली जलन और दर्द दूर होता है।

2) नींबू :

    नींबू के पेड़ की जड़ का चूर्ण 1 ग्राम पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से गुर्दे की बीमारी में लाभ मिलता है।
    लौकी के टुकड़े-टुकड़े करके गर्म करके दर्द वाले जगह पर रखने और इसके रस से मालिश करने से गुर्दे का दर्द जल्द ठीक होता है।

भोजन तथा परहेज :

    गुर्दे की सूजन से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद तुरन्त पेशाब करना चाहिए। इससे गुर्दे की बीमारी, कमर दर्द, जिगर के रोग, गठिया, पौरुष ग्रंथि की वृद्धि आदि अनेक बीमारियों से बचाव होता है।
    ज्यादा मात्रा में दूध, दही, पनीर व दूध से बनी कोई भी वस्तु न खाएं। इस रोग से पीड़ित रोगी को ज्यादा मांस, मछली, मुर्गा, ज्यादा पोटेशियम वाले पदार्थ, चॉकलेट, काफी, दूध, चूर्ण, बीयर, वाइन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
    इस रोग में सूखे फल, सब्जी, केक, पेस्ट्री, नमकीन, मक्खन आदि नहीं खाना चाहिए।

सब कुछ करो पर जन्मद‌िन के द‌िन कुछ ऐसे काम हैं जो नहीं करने चाह‌िए।

भारतीय संस्कृति में जन्मदिन को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसीलिए जन्मदिन को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। ज्योत‌िषशास्‍त्र में भी जन्मदिन का बहुत महत्व है। जन्म के दिन, समय और स्थान के आधार पर ही व्यक्त‌ि की वर्ष कुंडली बनती है। आपके ग्रह आपके प्रत‌िकूल न हों, इसल‌िए जन्मद‌िन के द‌िन कुछ ऐसे काम हैं जो नहीं करने चाह‌िए।

1. जिस दिन आपका जन्मद‌िन हो उस दिन बाल और नाखून नहीं कटवाना चाहिए। ये आयु के ल‌िए अच्छा नहीं माने गए हैं।

2. जिस दिन जन्मद‌िन हो उस दिन उत्सव मनाने के ल‌िए जीव की हत्या नहीं करनी चाह‌िए यानी मांस का सेवन जन्मद‌िन के द‌िन नहीं करना चाह‌िए। इससे आशीर्वाद के बजाय शाप म‌िलता है ज‌िससे आपको रोग और व‌िवादों का सामना करना पड़ता है।

3. जन्मदिन के दिन किसी साधु या भिखारी का अपमान नहीं करना चाहिए। यदि कोई याचक आपके दरवाजे पर आए तो उसे भोजन करवाएं या दान जरूर दें। इससे आयु और स्वास्‍थ्‍य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

4. जन्मद‌िन के द‌िन किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए, बल्कि जिनसे विरोध हो, उनसे भी प्रेमभाव से म‌िलना चाह‌िए। शास्‍त्रों के अनुसार जो व्यक्त‌ि इस द‌िन वाद-व‌िवाद में पड़ता है, उसका पूरा साल व‌िवादों में गुजरता है।

5. इस दिन गर्म पानी से स्नान करना शास्‍त्रों के अनुसार अनुकूल नहीं है। गंगाजल या क‌िसी अन्य पव‌ित्र जल को स्नान करने के पानी में म‌िलाकर स्नान करना शुभ माना गया है।

रुमाल को जेब में रखने से भी चमक सकती है किस्मत, जानिए कैसे -

1. मुश्किलों का आना
इंसान के जीवन में मुश्किलों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन जब ये मुश्किलें जरूरत से ज्यादा हमारे जीवन पर हावी होने लगती हैं तब ऐसा लगता है मानो अब इनका कोई अंत नहीं है। ये वो समय होता है जब हमें लगने लगता है कि अब परेशानियां ही हमारे जीवन का पर्याय बन चुकी हैं।

2. भगवान की शरण
ऐसी स्थिति में बहुत से लोग भगवान की शरण में चले जाते हैं तो कुछ ऐसे भी होते हैं जो पूरी तरह हार मानकर बैठ जाते हैं। हार मानना तो कोई रास्ता नहीं होता और ये बात पूरी तरह सच है कि एक ईश्वर ही हैं जो आपको परेशानियों से निकाल सकते हैं।

3. ईश्वर की आराधना
ईश्वर की आराधना करने के साथ-साथ कुछ ऐसे शास्त्रीय तरीके भी हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने बर्बादी के समय को अपने लिए फायदेमंद बना सकते हैं।

4. रुमाल
ये तरीके हमारे आए दिन प्रयोग होने वाले वस्तुओं से जुड़े हैं जैसे कि रुमाल। क्या कभी सोचा है कि एक रुमाल भी आपकी किस्मत बना सकता है और चाहे तो बिगाड़ भी सकता है।

5. रुमाल का प्रयोग
अंतर इस बात से पड़ता है कि आप उस रुमाल का प्रयोग किस तरह से करते हैं।

6. अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष के अनुसार ऐसे व्यक्ति जो अपने जीवन में सकारात्मकता या बड़ी सफलता का इंतजार कर रहे हैं वे जब भी रुमाल रखें उसके चार या छ: फोल्ड करके अपनी जेब में डालें।

7. रुमाल पर लिखना
आपको कभी अपने रुमाल पर पेंसिल या पेन से लिखना नहीं चाहिए, ऐसा करने से आपकी एकाग्रता में कमी आती है।

8. किसी का रुमाल
कभी किसी का रुमाल प्रयोग नहीं करना चाहिए और ना ही किसी को अपना रुमाल प्रयोग करने के लिए देना चाहिए।

9. रुमाल का रंग
रुमाल का रंग हमेशा हल्का होना चाहिए और हमेशा धुला हुआ रुमाल ही अपने पास रखें, अन्यथा आपके जीवन में नकारात्मकता घुल जाएगी जिससे पार पाना मुश्किल हो सकता है।

10. निःसंतान
अगर आप निःसंतान हैं या व्यवसाय में निरंतर हानि का सामना कर रहे हैं तो आपको अपने पास एक पीला वस्त्र अवश्य रखना चाहिए, वह कोई रुमाल भी हो सकता है या कोई अन्य कपड़ा।

11. ज्योतिष
ज्योतिष की भाषा में मंगल को क्षत्रिय और उग्र माना गया है, ऐसे लोग जिनकी कुंडली में मंगल दोष है या मंगल की स्थिति अनुकूल नहीं है उन्हें लाल रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना चाहिए।
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