पेशाब में रुकावट और पथरी का आजमाया हुआ घरेलु उपचार

पैरासिटामोल टेबलेट के हानिकारक परिणाम

सिर्फ 1 दिन में जोड़ों और घुटनों के दर्द से छुटकारा वो भी बिना किसी दवाई के !!!

बहुत सारे लोगों को जोड़ों और घुटनों के दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है | बढती उम्र के साथ ये समस्या और भी गंभीर हो जाती है | अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहें हैं और इलाज करवा कर थक चुके हैं तो घबराइए मत ऐसी बहुत सी प्राकृतिक औषधियां मौजूद हैं जो आप को इस समस्या से निजात दिला सकती हैं |

आज जो नुस्खा हम आप के लिए ले कर आये हैं वो अद्भुत चिकितिसीय गुणों से भरपूर है | इस में ऐसे anti-inflammatory तत्व मौजूद हैं जिन में मैग्नीशियम, सिलिकॉन, विटामिन सी और bromelain भरपूर मात्रा में होते हैं जो आप के स्नायुबंधन (ligaments) और tendons मजबूत बनाते हैं |
घुटने और जोड़ों के दर्द से राहत के लिए नुस्खा

सामग्री

    संतरे का रस एक कप            (a cup of orange juice (100% natural)
    पानी एक कप                       (a cup of water)
    दालचीनी की एक स्टिक       (1 cinnamon)
    कटा हुआ अनानास 2 कप    (2 cups of diced pineapple)
    शहद स्वाद अनुसार             (raw organic honey (to taste)
    आधा कप कूटे हुए बादाम     (½ cup of crushed almonds)
    जौ का दलिया एक कप         (a cup of rolled oats)

तैयार करने की विधि

एक बर्तन में जौ का दलिया और पानी मिलाएं और कुछ मिनटों के लिए आग पर पकाएं | जब ये पक जाये तो इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें और फिर सारी सामग्री एक ब्लैंडर में डाल कर अच्छी तरह से मिक्स कर लें | थोडा हल्का करने के लिए और पानी भी मिला सकते है |

इस मिश्रण को हर रोज इस्तेमाल करें । दर्द गायब हो जाएगा और आपके जोड़, tendons, स्नायुबंधन (ligaments) और मजबूत हो जायेंगे।
नुस्खा इतना प्रभावी कैसे है

अनानस में bromelain और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, विटामिन सी कंकाल प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, bromelain एक anti-inflammatory एजेंट के रूप में कार्य करता है। संतरा भी विटामिन सी, जो भी tendons और ligaments को मजबूत बनाने में मदद करता है के साथ भरपूर है।

दालचीनी भी anti-inflammatory गुणों के साथ रक्त परिसंचरण को बढावा देने और हड्डियों और जोड़ों को मजबूत करने में मदद करती है |
सेवन की विधि

यह आप सुबह खाली पेट या भोजन के कम से कम दो घंटे के बाद लीजिये. और इसके सेवन के बाद में दो घंटे तक कुछ भी खाना नहीं. आधे घंटे के बाद में गुनगुना या गर्म पानी पी सकते हैं

नेचुरल ऑर्गेनिक शैम्पू जो भर दे आपके बेजान बालों में जान

हर्बल शेम्पू बनाये :- ये सभी सामान आपको आयुर्वेद की दवा बेचने वाले पुराने पंसारी से मिल जायेगी .

सूखा आँवला- 50 ग्राम
रीठा- 50 ग्राम (बीज निकला हुआ )
शिकाकाई- 50 ग्राम
मेथी दाना -50 ग्राम
एलोवेरा का गूदा- 50 ग्राम

उपरोक्त सभी वस्तुओं को मिलाकर रातभर पानी में भिगो दीजिये और सुबह इसे 15 मिनट उबाल लीजिये.
जब ये ठंडा हो जाये तो इसे छानकर इसका पानी अलग कर लीजिये.

अब इस पानी में 1 नीबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लीजिये. एक बेहतरीन हर्बल शैम्पू तैयार है.

आप इसे एक बोतल में भरकर रख लीजिये और जब भी बाल धोने हों तो इस शैम्पू का इस्तेमाल कीजिये. यह शैम्पू बालों के लिये बहुत ही फायदेमंद है. हाँ इस से झाग तो नहीं मिलेगा, मगर स्वस्थ बाल ज़रूर मिलेंगे।

कपूर से कैसे करें घर की बदबू और कीड़ों मकोड़ो को दूर

कीटाणु मारे : कपूर कीटाणुओं को नष्ट करता है। ये हवा को शुद्ध बनाने का काम करता है। इसलिए अगर आप अपने घर को कीटाण मुक्त रखना चाहते हैं तो इसका एक अच्छा तरीका ये है कि रोज़ घर में थोड़ा कपूर जलाएं। नैचुरली कीटाणुओं का सफाया हो जाएगा।

बदबू दूर करे : आर्टिफिशियल रूम फ्रेशनर में फथालेट्स नाम का एक केमिकल होता है जो बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नुकसान पहुंचाता है। इस तरह के आर्टिफिशिय रूम एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल करने से बेहतर है कि आप बदबू दूर करने और ताज़गी लाने के लिए कपूर का इस्तेमाल करें। कमरे के बीचों बीच किसी दीये में रखकर कपूर जलाएं जिससे उसकी खुशबू कमरे में हर तरफ फैल जाए।

कीटाणुनाशक जैसा काम करे : कपूर नैचुरल कीटाणुनाशक है। इसलिए जब अगली बार आप घर में चींटी, कीड़े और मच्छर देखें तो इसी का इस्तेमाल करें।

चींटी – थोड़े पानी में कपूर घोल लें और फिर चींटी वाली जगह पर इसे छिड़कें। तुरंत चीटियों का सफाया हो जाएगा।

खटमल – खटमल होने पर अपनी बेडशीट धोएं और गद्दों को धूप लगाएं। फिर कपूर का बड़ा टुकड़ा लें, उसे मलमल के कपड़े में रखें और गद्दे के नीचे रख दें। इससे खटमल दूर होंगे।

मच्छर – कमरे का दरवाज़ा और खिड़कियां बंद कर लें और कपूर जलाएं। कमरे को इसी तरह 20-25 मिनट छोड़ दें। कपूर किसी और मच्छर भगाने वाले प्रॉडक्ट से ज्यादा बेहतर काम करता है। इसका असर लंबे वक्त तक रहता है।

रात को सोने से पहले करें इस जूस का सेवन, हो जाएगा मोटापा छूमंतर

लाइफस्टाइल: आज के समय की बात करें तो हम दूसरा व्यक्ति मोटापा की चपेट मे आ चुका है। जिसके निजात पाने के लिए आप हर तरह के उपाय अपनाते है। रोज जिम जाना, योगा, डाइटिंग करते है।बस तीन बूँद और पेट का मोटापा चला गया ... सस्ता घरेलू तरीका! कई लोग तो मोटापा से निजात पाने के लिए दवाओं का भी इस्तेमाल करते है। जिससे कि इस मोटापा से मुक्ति पा सके, लेकिन आप जानते है कि इन दवाओं का साइड इफेक्ट भी होता है। जो आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

अगर आप चाहते है कि आपका मोटापा तेजी से घटे तो हम आपको अपनी खबर में एक ऐसे जूस के बारें में बता कहे है। जिसका सेवन रात के समय करने से आपको जल्द ही मोटापा से निजात मिल जाएगा।  इस जूस को बनाने के लिए आपको किसी स्पेशल चीज की जरुरत नहीं होती है। यह सब चीजें आपके घर में आसानी से मिल जाएगी। जानिए कैसे बनाएं जूस।

सामग्री
1. 1 नींबू कटा हुआ
2. 1 ग्लास पानी
3. 1 खीरा
4. 1 चम्म्च पिसा हुआ अदरक
5.1 चम्मच एलोवेरा जूस
6. थोड़ा हरा धनिया
ऐसें बनाएं जूस

सबसे पहले इन चीजों को लेकर ग्राइडर में डालकर अच्छी तरह से पीस लें। फिर इसे रात को सोने से पहले पीएं। इसमें ऐसे तत्व पाए जाते है जो रात को लेने से आपके शरीर से फैट को कम करता है। जिससे आपका मोटापा कम होता है।
इसके अलावा यह जूस आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को गति देगा और और जिस समय आप नींद में होंगे आपका मेटाबॉलिज्म सक्रिय होकर मोटापा कम करने में सहायक होगा। रोज इस जूस का सेवन कुछ ही दिनों में आपको मोटापे से निजात दिला देगा। खास तौर से पेट की चर्बी को कम करने में यह बेहद काम की चीज है। इसलिए इसका सेवन रोज करें।

एक ऐसा प्रयोग जो अनेक लोगों किडनी डायलिसिस रुकवा चुका है

जिन लोगो को डॉकटरो ने किडनी ट्रांसप्‍लांट की सलाह दी हो, या डायलसिस चल रहा हो तो उन्हे किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के पहले इस दवा का प्रयोग जरूर करके देखना चाहिए हो सकता है कि ट्रांसप्‍लांट की नौबत ना आए। बता रहे हैं श्री ओम प्रकाश जी जिनको यही समस्या 2009 में आई थी, और डॉक्टर ने उनको किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए बोल दिया था। तो उन्होंने ना ही सिर्फ अपनी किडनी को स्वस्थ किया बल्कि ऐसे अनेक लोगो को भी इसका दम्भ झेलने से बचाया।

किडनी ट्रांसप्लांट करवाना बहुत महंगा हैं, और कुछ लोग तो ये अफोर्ड नहीं कर सकते, और जो कर भी सकते हैं तो किडनी ट्रांसप्लांट के बाद पहले जैसा जीवन नहीं बन पाता। मैं 17 अक्टोबर 2009 से किडनी की समस्या से झूझ रहा था अप्रैल 2012 मे मुंम्बई के नानावाती हॉस्पिटल के डॉक्टर शरद शेठ से ट्रांसप्लांट की बात भी तय हो चुकी थी लेकिन इसी दरमियान अखिल भारतीय शिक्षकेतर कर्मचारी संघ के महासचिव डॉक्टर आर बी सिंह से मुलाकात हो गई और उन्होने कहा की यह काढ़ा 15 दिन पीने के बाद अपना फैसला लेना है के आपको क्या करना है, मैने उनकी बात मानकर काढ़े का उपयोग किया और एक हफ्ते के बाद चलने फिरने मे सक्षम हो गया तब से में अभी तक पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ कोई दवा भी नही लेता हूँ और ना ही कोई खाने पीने का परहेज ही करता हूँ, और ना ही किसी प्रकार की कमजोरी महसूस करता हु।

डायलिसिस से बचने वाला काढ़ा बनाने की विधि
250 ग्राम गोखरू कांटा (ये आपको पंसारी से मिल जायेगा) लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए और कांटा फेंक दीजिए। इस काढे को सुबह शाम खाली पेट हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए। शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद। काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रोटिन पूर्ववत ही रखिए।

15 दिन के अंदर यदि आपके अंदर अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाए तो डॉक्टर की सलाह लेकर दवा बंद कर दीजिए।जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है। मुझे उम्मीद है की ट्रांसप्लांट का विचार त्याग देंगे जैसा मैने किया है। मेरा ये अनुभव नवभारत टाइम्स में भी छाप चूका हैं। जिसके बाद मुझे बहुत फोन आये और 3-400 लोगो को मैंने ये बताया भी।

जिसमे से 90 % से ऊपर लोगो को आराम मिला। और अगर आप भी ये प्रयोग करना चाहे तो निश्चिन्त हो कर करिये और अगर ऊपर लिखा हुआ समझ में ना आये या किसी प्रकार की शंका हो तो मुझसे मेरे फोन नंबर 8097236254 पर व्हाट्सप्प द्वारा सहायता मांग सकता है। आपको आराम मिले तो आप दूसरे भाइयो को भी इसी प्रकार बताइये।

Gallbladder Stone (पित्त की थेली) की पथरी निकालने का प्राकृतिक उपचार!

आज बहुत से लोग इस से परेशान हैं, और डॉक्टर भी इस के आगे फेल हैं।

कृपया शेयर करते रहिये।

पहले 5 दिन रोजाना 4 ग्लास एप्पल जूस (डिब्बे वाला नहीं) और 4 या 5 सेव खायें …..

छटे दिन डिनर नां लें ….

इस छटे दिन शाम 6 बजे एक चम्मच ”सेधा नमक” ( मैग्नेश्यिम सल्फेट ) 1 ग्लास गर्म पानी के साथ लें …

शाम 8 बजे फिर एक बार एक चम्मच ” सेंधा नमक ” ( मैग्नेश्यिम सल्फेट ) 1 ग्लास गर्म पानी के साथ लें …

रात 10 बजे आधा कप जैतून ( Olive ) या तिल (sesame) का तेल – आधा कप ताजा नीम्बू रस में अच्छे से मिला कर पीयें …..

सुबह स्टूल में आपको हरे रंग के पत्थर मिलेंगे …

नोट: पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें।

रविवार को करें रोटी-गुड़ का ये एक छोटा-सा अचूक उपाय, पैसे से भर जाएगा आपका घर

हर कोई चाहता है उसका अपना खुद का घर हो, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद घर नहीं बन पाता।
    दरअसल, भूमि लाभ ग्रहों के शुभ फल पर निर्भर है। यदि कुंडली में मंगल, सूर्य कमजोर हैं…नीच के हैं या उन पर किसी पाप ग्रहों की नजर है, तो घर नहीं बनने देते। अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोगों के एक नहीं, बल्कि कई घर होते हैं…कई प्लॉट होते हैं। ऐसे लोगों के ग्रह बली होते हैं। वैसे भी मौजूदा दौर में मकान बनाना बहुत मुश्किल हो रहा है। यदि आप सालों से किराए के मकान में रह रहे हैं।

    खुद का घर नहीं बन रहा है। वैसे ऐसा तो नहीं होगा कि आप घर खरीदने या बनाने के बारे में सोचते न हो या प्लालिंग न करते हों, लेकिन कोई न कोई अड़चन आ जाती है, जिसके चलते सारी योजना धरी की धरी रह जाती है। इसका मतलब यह है कि आपकी कुंडली में ग्रह अशुभ हैं, जो खुद के घर का सुख नहीं दे रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा अचूक उपाय है, जिसे करने से मंगल और सूर्य मजबूत होंगे और घर बनने या खरीदने में आ रही बाधाएं स्वत: ही दूर हो जाएंगी

    इसके बाद घर में एक ताजे आटे की रोटी बनवाएं। रोटी जब ठंडी हो जाए, तो उसमें पुराने गुड़ की एक साबुत भेली रख लें और किसी गौशाला में जाकर लाल गया को खिला दें। ध्यान रखें रोटी-गुड़ गाय के सामने फेंके नहीं, बल्कि हाथ से गाय को खिलाएं। इसके बाद हाथ जोड़कर गाय को प्रणाम करें और गाय के पैर पड़ें। यह उपाय लगातार करें। आप देखेंगे कि अचानक आपके घर बनने की योजना शुरू होगी और कोई बाधा भी नहीं आएगी।

इस उपाय का एक और फायदा यह है कि यदि आपका घर इस उपाय के करने से बनता है, तो आपकों घर के लिए आर्थिक तंगी का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा। यदि आप लोन लेकर घर बनाएंगे या बना हुआ खरीदेंगे, तो इसके लोन चुकाने में भी आपकों कभी कोई परेशानी नहीं आएंगी। तो देर किस बात की, कल है रविवार और बेहद शुभ मुहूर्त भी हैं। नवरात्रों का समय है। अष्टमी है…हर तरफ कन्या पूजी जाएंगी और आप यह उपाय शुरू कर सपनों के आशियानें की नींव रख सकते हैं।

    यदि कुंडली में गुरु नीचका है, मंगल दुश्मन घर मेें बैठा है और सूर्य पर राहु-केतु की नजर है, तो निश्चित ही घर बनने में बाधा आएगी। ऐसे में ग्रहों को शुभ बनाने के लिए आपको कम से कम लगातार 21 रविवार को एक उपाय करना होगा। रविवार को सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले भगवान सूर्य को अद्र्ध दें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा गंगाजल, अक्षत, लाल गुलाब की पंखुडिय़ां, हल्का सिंदूर, चीनी मिलाकर सूर्य को अद्र्ध दें। ध्यान रहे कि अद्र्ध जब दें, तो आपकी नजरें लोटे से नीचे की ओर गिर रही धार पर हो ना कि सूर्य भगवान की ओर…। ये भी ध्यान रखें कि पानी के छींटें पैरों पर न आएं। अद्र्ध देते समय ओम घृणि सूर्याय नम: मंत्र बोलते रहें।

कुछ ही सेकंड्स में दांतों के दर्द (Teeth Pain) से राहत..!!

 समग्री – Ingredients

     ½ चमच लौंग(clove) का पाउडर
     ½ चमच नारियल तेल

लौंग में eugenol होता है जो के analgesic का  प्रभाव  देता है और नारियल तेल एंटीबैक्टीरियल होता है जो दांतों  के बैक्टीरिया को ख़त्म कर देता है जो दर्द का कर्ण हो सकते है |

विधि – Preparation – बताई गई सामग्री  को एक साथ मिला कर पेस्ट तयार करने के बाद , ड्रापर या टूथब्रश की सहायता से दर्द ग्रस्त जगह पर दिन में तीन बार लगाने से रहत मिलती है |

गजब का पेन किलर है एल्यूमिनियम फॉयल (aluminium foil)

शरीर के दर्द वाले हिस्से पर एल्यूमिनियम फॉयल लगा रात भर के लिए छोड़ दें !

1.गर्दन – पीठ – कंधे – घुटने या पैरों में दर्द हो रहा हो तो दर्द वाले हिस्से पर एल्यूमिनियम फॉयल लगाएं – दर्द गायब होजाएगा !इस फॉयल में चिकित्सकीय गुण होते हैं – एल्यूमिनियम फॉयल का एक टुकड़ा दर्द वाली जगह लगा उस पर बैंडेज बांध दें,इससे दर्द मे काफी राहत मिलेगी !

2.यह गठिया और निशान के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है !

3.कमर दर्द सताने लगे – दवाई न खाएं – रसोई में रखे एल्यूमिनि
म फॉयल को कमर पर लपेट कर उसके ऊपर गर्म पट्टी बांध कर सो जाएं – दर्द में आराम मिल जाएगा !

4.शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द होने पर एल्यूमिनियम फॉयल लपेट कर गर्म पट्टी बांध कर 10 से 12 घंटों के अंतर्गत दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है !

5.फॉयल से जुकाम भी ठीक होता है – इसके लिए 5 – 7 परतों में फॉयल को अपने पैर पर लपेटें – हर परत के बीच कागज और पतला सा कपड़ा लगा दें – कुछ देर ऐसे ही रहने दे !लगभग दो घंटे बाद इसे निकाल कर रीसेट करें -करने से जुकाम में आराम मिलेगा |फिर से कुछ देर के लिए इसे ऐसे ही रहने दें। उपचार को तीन बार दोहराया जाना चाहिए।

एल्युमीनियम फॉयल use करने के पीछे कांसेप्ट यह है की यह प्रभावित अंग की गर्मी को एक ही जगह स्थिर कर देता है गर्मी के कारण ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है नियमित करने से नसों में जमा एक्स्ट्रा फैट पिघलती है इन सबसे दर्द में राहत मिलती है लेकिन कोई यह सोचे की इसमें कोई चिकित्सकीय गुण है तो ठीक नहीं है मुख्य बात गर्मी को एक ही जगह संकेंद्रित करने की है जो की एल्युमीनियम फॉयल बेहतर ढंग से करता है

सिर्फ सात दिन में बवासीर की छुट्टी, आजमाकर देख लीजिए

यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ और मरीजो पर प्रयोग करने पर 100 में से 90 मरीज लाभान्वित हुए यानि कि 90 प्रतिशत सफल है तो आइये जाने आप उस नुस्खे के बारे में।कभी सोचा ही नहीं था कि बिजली के बिल पर पैसे बचाना इतना आसान होगा।

50% औषिधि बनाने की विधि : अरीठे या रीठा के फल में से बीज निकाल कर शेष भाग को लोहे की कढाई में डालकर आंच पर तब तक चढ़ाए रखे जब तक वह कोयला न बन जाए जब वह जल कर कोयले की तरह हो जाए तब आंच पर से उतार कर सामान मात्रा में पपडिया कत्था मिलाकर कपडछन (सूती कपडे से छान कर) चूर्ण कर ले बस अब ये औषिधि तैयार है।

औषिधि सेवन करने का तरीका : इस तैयार औषिधि में से एक रत्ती (125मिलीग्राम ) लेकर मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम लेते रहे, इस प्रकार सात दिन तक दवाई लेनी होती है।

इस औषिधि के मात्र सात दिन तक लेते रहने से ही कब्ज, बवासीर की खुजली, बवासीर से खून बहना आदि दूर होकर मरीज को राहत महसूस करने लगता है।
यदि मरीज इस रोग के लिए सदा के लिए छुटकारा पाना चाहे तो उन्हें हर छ: महीने के बाद फिर से 7 दिन का यह कोर्स बिलकुल इसी प्रकार दोहरा लेना चाहिए।

अरीठे या रीठा के अन्य भाषा में नाम :

• संस्कृत – अरिष्ट ,रक्तबीज,मागल्य
• हिन्दी- रीठा,अरीठा ,
• गुजराती- अरीठा
• मराठी- रीठा
• मारवाड़ी-अरीठो
• पंजाबी- रेठा
• कर्नाटक-कुकुटेकायि

औषिधि सेवन के दौरान परहेज़ : ध्यान रखे की औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है । देशी इलाज में पथ्यापथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है कई रोगों में तो दवाई से ज्यादा तो पथ्य आहार जादा कारगर होता है।

 औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या खाएं : मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, सांठी चावल, बथुआ, परवल, तोरई, करेला, कच्चा पपीता, गुड, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि पथ्य है। रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए।

औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या न खाएं : उड़द, धी, सेम, भारी तथा भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल की सवारी, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानिकारक है।
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