Rajni Kumari

कैसे करें किचन की सजावट, रसोई घर की सजावट के टिप्स - How to decorate kitchen, Best kitchen decoration tips

घर का किचन छोटा हो या बड़ा, उसका महत्व घर और घर के सदयों के लिए बहुत अधिक होता है क्योंकि यही वो जगह है जहां आपकी सेहत और स्वास्थ्य की सुरक्षा की सारी तैयारियां की जाती हैं। जगह की कमी की वजह से आजकल मॉड्यूलर किचन बहुत प्रचलित हो रहे हैं, कई इंटीरियर किए हुए घरों में भी मॉड्यूलर किचन का इस्तेमाल किया जा रहा है जो आपके घर को एक मॉडर्न लुक देता है और कम जगह से भी आपका कम आसानी से हो जाता है। अगर आपका किचन वही पुराने स्टाइल का है तो भी चिंता कि कोई बात नहीं, हम यहाँ कुछ ऐसे उपयोगी उपाय बता रहे हैं जो आपके किचन को खूबसूरत बनाने में आपकी मदद करेंगे।

छोटे किचन के लिए डेकोरेशन (Small kitchen decorating ideas)अगर आपका किचन थोड़ा छोटा है या आपके किचन में कम जगह है तो किचन की दीवारों पर हल्के रंग का इस्तेमाल करें। इससे किचन को ब्राइट और बड़ा लुक मिलता है। आपका किचन पहले से ज़्यादा आकर्षक और बड़ा दिखेगा। इसके लिए आप सफ़ेद के साथ किनारों पर कम मात्रा में लाल या पिंक कलर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

किचन को सजाने के आसान उपाय, किचन के टाईल्स (Decorate kitchen wall)
किचन को डेकोरेट करते समय प्रयोग की जाने वाली टाईल्स पर खास ध्यान देना ज़रूरी होता है। अगर आपका किचन बहुत ही साधारण डिज़ाइन वाला है तो आकर्षक टाईल्स की मदद से आप उसे एकदम नया और अलग लुक दे सकते हैं। आप किचन कि दीवारों पर दो रंगों के टाईल्स का प्रयोग किचन की सजावट (kitchen ki sajavat) के लिए कर सकते हैं। अगर आप व्हाइट टाईल्स का प्रयोग कर रहे हैं तो उसके साथ ग्रे या चॉकलेट कलर के टाईल्स को बीच बीच में हाइलाइट करने के लिए लगा सकते हैं। यह एक बहुत ही प्रचलित किचन डेकोरेशन आइडिया (kitchen decoration idea in hindi) है जिसमें सजावट के लिए प्रिंटेड टाईल्स का प्रयोग किया जाता, जैसे कॉफी मग या फलों की डिज़ाइन वाले टाईल्स प्लेटफॉर्म के आस पास के हिस्से को सजाने के लिए बेहतरीन हो सकते हैं। यह व्हाइट या ऑफ व्हाइट कलर के टाईल्स के साथ उभर कर दिखते है और किचन की वाल को खूबसूरत बनाने में मदद करते हैं।

किचन की खिड़की (Best way to decorate kitchen, Kitchen decoration tips in Hindi)
किचन की खिड़की को आप एक खूबसूरत लुक देकर सभी का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। अगर आपके किचन की खिड़की में जगह हो तो वहाँ हैंगिंग शो पीस लटकाया जा सकता है। ध्यान रहे कि, किचन की खिड़की हवादार और खुली हुई होनी चाहिए।यह न केवल हवा के आने जाने के लिए ज़रूरी है बल्कि इससे आपको भी बाहर की जगह साफ़ दिखाई देती है और बाहर के खुले वातावरण को देखकर आपके मन को भी एक चेंज मिलता है।

एक से समान के लिए एक जगह (Best kitchen decoration idea, Simple kitchen design idea)
किचन को खूबसूरत बनाने के साथ चीजों को व्यवस्थित ढंग से रखना भी किचन की सजावट का एक अहम हिस्सा है। किचन में उपयोग की सभी चीजों का स्थान निश्चित करें। जैसे चम्मच, कप काँच के समान आदि को एक साथ अलग अलग रखें। सभी प्रकार के चम्मचों की एक निश्चित जगह बनाएँ। इसी तरह कटोरी और एक तरह के मटेरियल के बर्तनों की जगह भी एक साथ होनी चाहिए। उससे किचन सुंदर तो दिखता ही है साथ ही आपको चीजों को भी ढूँढने में आसानी होती है।

केबिनेट का करें इस्तेमाल (Best kitchen interior ideas kitchen decoration idea with cabinets)
अगर आपके किचन में बहुत से केबिनेट हैं जिसमें आपने समान भर कर रखा है तो इन्हें दोबारा से व्यवस्थित करने का समय आ चुका है। आप इन बंद केबिनेट के सामानों को सजावट के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपके ड्रावर या केबिनेट के दरवाजे काँच के हैं तो आप इन पारदर्शी काँच के पीछे खूबसूरत काफी मग,

कप सेट या सुंदर क्रॉकरी रख सकती हैं। पारदर्शी काँच की आड़ में रंगीन बर्तन और चीज़ें बहुत आकर्षक लगती हैं।

हरे पौधों से सजाएँ किचन (Simple kitchen design, Decorate kitchen with plants)
हरियाली आँखों को सुकून देती है। हरे पौधों को देखकर आपका मन बेहतर महसूस करता है, अगर विश्वास न हो तो आप खुद आज़मा कर देखें। जब आप दिन भर की थकान के बाद शाम को चाय का प्याला लेकर अपने छोटे से गार्डन में बैठते हैं तो आपका मन बहुत हल्का महसूस करने लगता है और ऐसा महसूस होता है मानों सारी थकान गायब हो गयी, यह हरे पौधों की उपस्थिति की वजह से होता है। पौधों में मानव मन को बदलने और अच्छा महसूस कराने की क्षमता होती है। अगर आपके पास छोटे छोटे गमले हैं तो उन्हें सुंदर रंगों से रंगें और उसमें घर के अंदर पनप सकने वाले नन्हे पौधे रोप दें। पौधों के साथ ये आकर्षक गमले भी आपके किचन की शोभा बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे।

कॉर्नर को सजाएँ फूलों से (Modular kitchen designs for small kitchens)
अगर आप अपने किचन को सजाने के साथ सुंदरता भी प्रदान करना चाहते हैं तो किचन में फूलों से किसी प्रकार की सजावट ज़रूर करें। किचन के कोने को सजाने के लिए यह बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इसके लिए आप आर्टिफ़िशियल फूलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर ‘L’ शेप के किचन में कोना थोड़ा अजीब लगता है और उस जगह को नज़रअंदाज़ करते करते यह जगह कचरे या बिना ज़रूरत के समान रखने की एक जगह बन जाती है। इस कोने को फ्लावर पॉट की मदद से सजाएँ।

रोशनी से सजाएँ किचन (Kitchen lighting tips, Decorate kitchen with LED lights)
आजकल बाज़ार में आकर्षक और बहुत ही खूबसूरत एलईडी लाइट और फोकस लाइट आदि उपलब्ध हैं जिनकी मदद से आपके किचन को एक मॉडर्न लुक मिल सकता है। किचन की सीलिंग पर इनका उपयोग आकर्षक हो सकता है और अगर आपका किचन थोड़ा बड़ा है या डाइनिंग टेबल की जगह भी किचन से लगी हुई है तो टेबल के ऊपर की सीलिंग को इन डेकोरेटिव लाइट्स की मदद से आकर्षक बनाया जा सकता है। यह लाइट्स कई तरह के रंगों में मिल जाते हैं।

सिंक एरिया (Kitchen sink ideas – Small kitchen design indian style)
आजकल इंटीरियर डिज़ाइनर किचन के हर हिस्से पर ध्यान देते हैं। किचन की सजावट के लिए सिंक या बर्तन धोने की जगह कई बार खूबसूरत किचन के आकर्षण को खत्म कर देती है, लेकिन जब भी आप अपने किचन का निर्माण करवा रहे हों या दोबारा किचन में कुछ बदलाव कर रहे हों तो किचन के सिंक एरिया का विशेष ध्यान रखें। आजकल डिज़ाइनर सिंक और वॉश बेसिन आ रहे हैं, किचन के लिए खास दो खानों वाले सिंक का इस्तेमाल करें जिसमें बर्तन धोकर रखने की जालीदार जगह होती है। एक तरफ बर्तन धोने के साथ जाली में बर्तन को रखा जा सकता है जिसका पानी सिंक में ही गिरता है और किचन की अन्य जबह गीली नहीं होती।

किचन फ्लोर (What kind of floor is best for kitchen?)
किचन का फ्लोर किचन की सजावट में अहम भूमिका निभाता है। आप इसके लिए जिस भी तरह के फ्लोर को अपनाएं, इस बात का ध्यान रखें कि, फ्लोर का कलर ऐसा हो जो आपके किचन की बाकी चीजों के साथ मैच करें। घर के अन्य कमरों की अपेक्षा किचन का फ्लोर जल्दी और ज़्यादा गंदा होता है, उसमें तेल आदि की वजह से जल्दी चिकनाई जमती है, तो इसके लिए डार्क रंग के फ्लोर अच्छे होते हैं।
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हरी मिर्च खाने के भी होते हैं कई चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ : Amazing Health Benefits of Green Chilli

हरी मिर्च सिर्फ हमारे खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि इसमें छुपे होते हैं कई स्वास्थ्य लाभ ! वैसे आपने कई जगह हरी मिर्च से होने वाले नुक्सान के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन आइये आज आपको बताते हैं हरी मिर्च से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में !

ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है
हरी मिर्ची के सेवन से ब्लड प्रेशर काफी हद तक नियंत्रित रहता है वहीँ शुगर के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है उस स्थिति में भी हरी मिर्ची बेहद कारगर है !

फेफड़ो के केंसर में फायदेमंद
फेफड़ो के केंसर से बचने के लिए रोज हरी मिर्ची का सेवन करें और अगर आप धूम्रपान के आदि हैं तब तो प्रतिदिन हरी मिर्ची खाएं क्योंकि धूम्रपान करने वालों को फेफड़ो का केंसर होने की सबसे ज्यादा सम्भावना होती है !

मूड बूस्टर है हरी मिर्ची
हरी मिर्ची खाने से हमारे मस्तिष्क में एंडोर्फिन का संचार होता है जो हमारे खुशमिजाज रहने का सबसे अहम् कारण होता है, तो हमेशा खुशनुमा रहने के लिए हरी मिर्च जरूर खाएं !

विटामिन c से भरपूर
हरी मिर्च विटामिन c से भरपूर होती है जिससे हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ! हरी मिर्च का एक और फायदा है अगर आपकी नाक बंद है तो इसे खा लीजिये आपकी नाक खुल जाएगी !

त्वचा के संक्रमण से बचाव
हरी मिर्ची में एंटी बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जिस कारण हमारे शरीर और ख़ास कर हमारी त्वचा किसी भी संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षित रहती है !

मोटापा कम करने में सहायक
हरी मिर्च में कैलोरी नहीं पाई जाती जिससे इसके सेवन से मोटापा होने के आसार नहीं रहते और हमे सिर्फ इसके पोषक तत्व ही मिलते हैं !

प्रोस्टेट कैंसर से बचाव
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों को होता है और प्रोस्टेट कैंसर के होने की सम्भावना को कम करने के लिए रोज हरी मिर्च का सेवन करना चाहिए !

दिल की बीमारियों की संभावना कम हो जाती है
हरी मिर्च के सेवन दिल से जुडी बीमारियों के होने की सम्भावना काफी हद तक कम हो जाती है और साथ ही रक्त थक्को की बीमारी से भी निजात मिलती है !
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कान में आवाज गूंजना, टिनिटस की निशानी : Ringng Ears Can Cause Tinnitus

टिनिटस एक ऐसी बीमारी है जिसमे बिना किसी वजह के कानों के अंदर एक आवाज़ गूंजती रहती है। यह आम समस्या नहीं है। यह बीमारी नहीं बल्कि किसी बीमारी का लक्षण है। यह blood vessels की समस्या या उम्र के साथ सुनने की शक्ति कम होने से जोड़ी जा सकती है। लोग इस समस्या से काफी परेशान रहते हैं क्योंकि इससे सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है। इसके बावजूद यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। उम्र के साथ साथ लोगों की सुनने की क्षमता कम हो जाती है। कुछ उपचारों की मदद से इसे ठीक किया जा सकता हैं।

टिनिटस के लक्षण (Symptom of Tinnitus)
आसपास किसी भी तरह की आवाज़ ना होते हुए भी कानों में आवाज़ का गूंजना ही टिनिटस कहलाता है। इसके कुछ लक्षण:-

    सिसकारी
    दहाड़
    कानबजना
    आवाज़गूंजना

स्थिति के गंभीरता के अनुसार कान में आवाज़ का गूंजना कम या ज़्यादा हो सकता है। कुछ लोगों को आवाज़ें एक कान में ही सुनाई देती है, कुछ को दोनों कानों में। कुछ लोगों को ये आवाज़ें इतनी तेज़ सुनाई देती है कि वो असली आवाज़ ही नहीं सुन पाते। कुछ लोगों के लिए यह समस्या अस्थायी रूप से परेशान करने वाली होती है और अन्य लोगों काफी दिनों तक इस समस्या से परेशान रहते है।

टिनिटस के प्रकार (Type of Tinnitus)
1. व्यक्तिपरक टिनिटस (Subjective Tinnitus)
यह एक ख़ास प्रकार का टिनिटस है जिसमें आप सुन सकते हैं। ज़्यादातर लोग को इस प्रकार के टिनिटस होता हैं। इसका मुख्य कारण कान के अंदरूनी, बाहरी तथा मध्य भाग में समस्या होना होता है। अगर आप को सुनने की नसों में कोई समस्या हैं तो आपको व्यक्तिपरक टिनिटस की है।

2. वस्तुगत टिनिटस (Objective Tinnitus)
यह टिनिटस काफी कम लोगों में पाया जाता है। सिर्फ डॉक्टर ही जांच के दौरान इसे सुन सकते हैं। इस प्रकार के टिनिटस का मुख्य कारण blood vessels में किसी प्रकार की समस्या है। यह अंदरूनी हड्डियों की कोई समस्या मांसपेशियों में मरोड़ की परेशानी हो सकती है।
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जानिए तिल खाने के कुछ अनोखे फायदे : Health Benefits of Sesame

घर पर व्यंजनों और खास तौर पर मकर संक्रांति पर चिक्की बनाने में उपयोग किए जाने वाला तिल तिल्ली, कई प्रकार से अपने खास गुणों के कारण फायदेमंद है। यह हर तरह से आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में बेहद लाभदायक है। आइये जानते है तिल केकुछ बेहतरीन फायदे।

Health Benefits of Sesame in Hindi (Til ke Fayde)
  1.     तिल का नियमित प्रयोग मानसिक दुर्बलता कम करता है, जिससे आप तनाव, depression से मुक्त रहते हैं। प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में तिल का सेवन करने से आप मानसिक समस्याओं से निजात पा सकते हैं।
  2.      बालों के लिए तिल का प्रयोग वरदान साबित हो सकता है। तिल के तेल का प्रयोग या रोज थोड़ी मात्रा में तिल को खाने से, बालों का झड़ना बंद हो जाता है।
  3.      चेहरे पर निखार के लिए भी तिल का उपयोग किया जाता है। तिल को दूध में भिगोकर उसका paste चेहरे पर लगाने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और रंग भी निखरता है। तिल के तेल की मालिश करने से भी त्वचा कांतिमय (Patinated) हो जाती है।
  4.      तिल को कूटकर खाने से कब्ज (constipation) की समस्या नहीं होती। काले तिल को चबाकर खाने के बाद ठंडा पानी पीने से बवासीर (piles) में लाभ होता है। इससे पुराना बवासीर (piles) भी ठीक हो जाता है।
  5.      शरीर के किसी भी अंग की त्वचा जल जाने पर, घी और कपूर के साथ तिल को पीसकर लगाने से आराम मिलता है और घाव भी जल्दी ठीक होता है।
  6.      सूखी खांसी हो जाने पर तिल को मिश्री व पानी के साथ सेवन करने से काफी लाभ मिलता है। लहसुन के साथ तिल के तेल को गर्म करके, गुनगुने रूप में ही कान में डालने से कान के दर्द में आराम मिलता है।
  7.      सर्दियों के दिनों में तिल का सेवन करने से शरीर में उर्जा का संचार होता है और इसके तेल की मालिश से दर्द में राहत मिलती है।
  8.     तिल, दांतों के लिए भी फायदेमंद होता है। सुबह शाम brush करने के बाद तिल को चबाने से दांत मजबूत होते हैं और यह calcium की आपूर्ति भी करता है।
  9.      फटी एड़ि‍यों पर तिल का तेल गर्म करके, उसमें सेंधा नमक और मोम मिलाकर लगाने से एड़ि‍यां जल्दी ठीक होने लगती है और साथ ही साथ ये एड़ियो को नरम और मुलायम भी बनाता है।
  10.      मुंह में छाले हो जाने पर, तिल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर लगाने पर छाले जल्दी ठीक होने लगते हैं।
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ऐसे टहलेंगे तो कुछ ही दिनों में हो जाएंगे बिल्कुल फिट

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने खोज की है कि समान गति से टहलने की तुलना में अलग-अलग गति से टहलने पर 20 फीसदी अधिक कैलोरी बर्न होती है। इस स्टडी के जरिए अलग-अलग गति से टहलने के दौरान कैलोरी बर्न का पहली बार जांच किया गया।

अब तक जयादातर स्टडी समान गति से टहलने के दौरान हुए कैलोरी बर्न पर केंद्रित रहे हैं।  शोध के सहायक लेखक मनोज श्रीनिवासन का कहना है कि अलग-अलग चाल के दौरान मेटॉबोलिक की जांच महत्वपूर्ण है क्योंकि सभी लोग ट्रेडमिल का इस्तेमाल नहीं करते और न ही एक समान गति से टहलते हैं।

स्टडी में यह बात सामने आई है कि वजन कम करने के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए लोग रोजाना टहलने या खेल के दौरान बर्न हुए कैलोरी पर अधिक ध्यान नहीं देते। श्रीनिवासन का कहना है कि गति में बदलाव कर टहलने से कैलोरी बर्न होती है।

चाल बदलने पर पैरों पर ध्यान
सामान्य तौर पर टहलने के दौरान 8 प्रतिशत तक एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। शोध की लेखक निधि सीतापथी का कहना है, ‘जब आप चाल बदलते हैं तो पैरों पर ज्यादा जोर दे रहे होते हैं। इससे ज्यादा ऊर्जा लगती है।’
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सर्दी में गुड़ खाने के फायदे : Benefits of Jaggery in Winters

वैसे तो गुड़ खाना आपके स्वास्थ्य और पाचन के लिए काफी लाभदायक होता है, लेकिन सर्दियों के मौसम में गुड़ खाने के अलग ही फायदे होते हैं। सर्दी के दिनों में गुड़ आपके लिए हर तरह से फायदेमंद होता है। जानिए सर्दियों में गुड़ खाने के बेहतरीन फायदे।

Benefits of Jaggery in Winters in Hindi (Sardi Mein Gud Khane ke Fayde)
गुड़ की तासीर गर्म होती है, इसलिए सर्दियों के दिनों में इसका सेवन आपको गर्माहट देता है। सर्दियों के मौसम में प्रति‍दिन सेवन आपको सर्दी, खांसी और जुकाम से भी बचाता है।

आम तौर पर सर्दियों के दिनों में रक्तसंचार (blood circulation) बहुत धीमा हो जाता है। लेकिन गुड़ का नि‍यमित सेवन करना रक्तसंचार (blood circulation) को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही ब्लड प्रेशर की समस्याओं में भी फायदेमंद होता है।

इन दिनों में गले और फेफड़ों में संक्रमण (infection) बहुत जल्दी फैलता है। इससे बचने के लिए भी गुड़ का सेवन बहुत मदद कर सकता है। सर्दी और संक्रमण (infection) की दवाईयों में गुड़ का प्रयोग किया जाता है।

पाचन संबंधी समस्याओं (digestion problem) के इलाज में भी गुड़ का सेवन बहुत लाभकारी होता है। खाना खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाना पाचन को और भी बेहतर बनाता है।

गुड़ मैग्नीशियम (magnesium) का एक बेहीतरीन स्रोत (source) है। गुड़ खाने से मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को थकान से राहत मिलती है। गुड़ खून की कमी दूर करने में भी बेहद मददगार साबित होता है।
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नमक और जैतून तेल : दर्द का घरेलु उपचार : Salt and Olive Oil for All Body Pain

जैसे-जैसे जमाना आगे बढ़ रहा है लोग आयुर्वेदिक इलाज को भूल कर दवाइयों का सहारा लेते जा रहे हैं । जिससे हमारे शरीर में साइड इफेक्ट होने लगते हैं। आयुर्वेदिक दवाइयों का सही उपयोग करें तो किसी प्रकार का साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। अगर आप गर्दन के दर्द (osteochondrosis) से पीड़ित है तो दवा से ज्यादा आयुर्वेदिक इलाज आपके लिए ज्यादा असर दार होगा।

सामग्री

    10 चम्मच उच्च गुणवता का नमक
    20 चम्मच जैतून का तेल

विधि
एक कांच का एयर टाइट बर्तन लेंगें। उसमे नमक और जैतून को मिला लेंगे। दो दिन तक उसे एयर टाइट बर्तन रहने दे ताकि हवा अंदर ना जा सके। दो दिन के बाद मे हल्के रंग की औषधि तेयार हो जाएगी।

उपयोग करने का तरीका
औषधि को जहाँ दर्द है वहाँ पर हल्के हाथों से 2-3 मिनट तक मालिश करें। मालिश करने की अवधि धीरे-धीरे बढ़ा लें। ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट तक मालिश काफी है। मालिश के बादमे गीले कपड़े से साफ कर लें।

मालिश करने के बादमे अगर जलन महसूस होती है तो बच्चो के इस्तेमाल का पाउडर लगायें इससे जलन से आराम मिलेगा।

औषधि हमारे शरीर में खून का बहाव बढ़ाएगी और मांसपेशियों को पुनजीवित कर तंत्रिका तंत्र और हड्डियों को मजबूत करेगी। इस इलाज से सिर दर्द की शिकायत दूर हो जाएगी। आपके पाचन तंत्र को मजबूत करेगी। शरीर में मोजूद जहरीले तत्वों से आराम दिलाएगी।
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वास्तुशास्त्र के अनुसार कैसा हो रसोईघर - Simple Vastu tips for kitchen

वास्तुशास्त्र हमारे घर की समृद्धि और शांति के लिए बहुत प्रभावकारी होता है जो लोग वास्तुशास्त्र में विश्वास रखते हैं वे घर के वास्तु से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। कुछ लोगों का यह मानना होता है की वास्तु से किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता पर हम आपको बता दें कि, वास्तुशास्त्र पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित है, विज्ञान पर तो लोगों का विश्वास होना स्वाभाविक ही है। इसमें दिशाओं के अनुसार घर और घर में रखे सामानों कि स्थिति तय की जाती है और कुछ विशेष कामों को करने की एक खास जगह होती है। प्राचीन समय से ही हर संस्कृति में ही हर कामों के लिए कुछ निश्चित जगह का चुनाव किया जाता है, जैसे खाना पकाने के लिए एक जगह तय की जाती है। नहाने के लियते स्नानागार या जिसे हम आज बाथरूम करते हैं, अलग स्थान में होता है, पूजा स्थल का अपना अलग स्थान रखा जाता है, इसी प्रकार कुछ कामों और घर में प्रयोग की जाने वाली सामग्रियों की भी एक निश्चित की हुई जगह होती है। इसमें चीजों और दिशाओं का विशेष महत्व होता है जो घर और परिवार के लोगों पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की किस दिशा में हो किचन? रसोई घर का वास्तु (Vastu tips for kitchen in 
Hindi)

घर का किचन या रसोईघर जहां खाना पकाया जाता है वह दक्षिण पूर्वी कोने या आग्नेय कोण में होना चाहिए। अगर आपके घर की यह जगह सुविधाजनक न हो तो रसोई को आप वायव्य कोण या उत्तर-पश्चिम कोण में रसोईघर बनाया जा सकता है।

रसोई का वास्तु – किचन का वास्तु (Kitchen ka Vastu)  

 खाना पकाने की जगह (Cooking place in kitchen)

किचन में खाना पकाने वाला चूल्हा या गैस बर्नर पूर्व दिशा में होना चाहिए, अर्थात खाना पकाने वाले का मुख पूर्व दिशा में होना वास्तु के हिसाब से शुभ माना जाता है।
गैस और प्लेटफॉर्म (Gas and platform)

किचन का वास्तु तय करते समय यह भी ध्यान रखें कि गैस बर्नर या चूल्हा बाहर से दिखाई न दे। मतलब चूल्हे की स्थिति इस प्रकार होनी चाहिए की बाहर से वह दिखाई न दे इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

सिंक या पानी की जगह (Sink and washing area)
वास्तुशास्त्र के अनुसार किचन में सिंक या बर्तन धोने की जगह चूल्हे से थोड़ी दूरी पर होनी चाहिए। आग और पानी को आपस में विरोधी माना जाता है, अगर ये दोनों एक जगह होते हैं तो एक दूसरे से परस्पर विरोध का भाव दर्शाते हैं, इसका सीधा प्रभाव परिवार के लोगों के आपसी रिश्तों के मध्य दिखाई देता है। इसका सबसे अच्छा समाधान यह होगा कि, सिंक या बर्तन आदि धोने की जगह किचन के उत्तरपूर्वी दिशा में हो। पीने का पानी भी इसी दिशा में रखना उचित होता है।

बिजली के उपकरण (Kitchen electrical appliance)
आजकल महिलाएं रसोईघर में विभिन्न प्रकार के बिजली से चलने वाले उपकरणों का प्रयोग करती है जो किचन के कामों को आसान बनाने में उनकी मदद करता है, इन सामानों की जगह भी वास्तु के अनुसार तय की गयी है। अगर यह सही स्थान पर न रखा जाए तो परिवार और घर में रहने वाले लोगों की सेहत पर असर डालता है। फ्रिज या रेफ्रीजरेटर को दक्षिण पश्चिम दिशा में रखना उचित होता है। एक्सॉस्ट फैन को पूर्वी दीवार या दक्षिण पूर्वी कोने की दीवार में होना चाहिए। अन्य दूसरे उपकरण जैसे माइक्रोवेव, मिक्सी आदि भी दक्षिण पूर्व में रखें। स्टोरेज (storage) के लिए उत्तर पूर्वी कोना वास्तु के अनुसार श्रेष्ठ माना जाता है।


वास्तु के अनुसार रसोईघर के लिए इस बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए (Vastu ke anusar kitchen)
  1.     किचन का निर्माण कराते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किचन में वायु का उचित पारगमन या आना जाना बना रहे।
  2.     किचन की बड़ी खिड़कियाँ पूर्व दिशा में होनी चाहिए।
  3.     किचन वास्तु के अनुसार अगर रसोई में छोटी खिड़कियाँ (small window) बनवा रहे हैं तो उसे दक्षिण दिशा में बनवाएँ।
  4.     किचन (vastu ke anusar kitchen ka rang) में हरे रंग के अलावा अन्य रंगों जैसे लाल, पिंक, ऑरेंज, चॉकलेट और व्हाइट आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  5.     किचन के साथ टॉयलेट या बाथरूम (bathroom) सटे हुए नहीं होना चाहिए।
  6.     वास्तु के अनुसार रसोईघर (vastu ke anusar rasoighar) में भोजन करने को सही नहीं माना जाता। भोजन का स्थान रसोई से बाहर होना चाहिए।
  7.     घड़ी दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना ठीक होता है।
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